श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, तिरुमला (तिरुपति बालाजी)

श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, तिरुमला (तिरुपति बालाजी)

परिचय – विश्व का सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध तीर्थ

श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, जिसे तिरुपति बालाजी मंदिर भी कहा जाता है, भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के सबसे अधिक दर्शन किए जाने वाले मंदिरों में शामिल है। यह मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुमला पहाड़ियों (सप्तगिरि) पर स्थित है और भगवान वेंकटेश्वर (भगवान विष्णु के अवतार) को समर्पित है।

हर वर्ष लगभग 2.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं, जिससे यह मंदिर आस्था और भक्ति का विश्वस्तरीय केंद्र बन गया है।

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तिरुमला पहाड़ियों (Sapthagiri) का पौराणिक उद्गम

तिरुमला क्षेत्र Seshachalam पर्वत श्रृंखला का भाग है। मान्यता है कि शेषनाग ने भगवान विष्णु की सेवा के लिए अपने शरीर से सात पवित्र पहाड़ियों का निर्माण किया, जिन्हें सप्तगिरि कहा जाता है:

  • शेषाद्रि

  • नीलाद्रि

  • गरुड़ाद्रि

  • अंजनाद्रि

  • वृषभाद्रि

  • नारायणाद्रि

  • वेंकटाद्रि (यहीं मुख्य मंदिर स्थित है)

भूगर्भ वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह पर्वत श्रृंखला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रेणियों में गिनी जाती है।


भगवान वेंकटेश्वर के अवतार की कथा

1 कलियुग और पृथ्वी की प्रार्थना

कलियुग में धर्म की हानि को देखकर पृथ्वी देवी ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने वेंकटेश्वर रूप में पृथ्वी पर अवतार लेने का वचन दिया।

2 भृगु मुनि की घटना

भृगु मुनि द्वारा भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर पैर रखने से देवी लक्ष्मी रुष्ट होकर पृथ्वी पर आ गईं। उनके विरह में भगवान भी तिरुमला में तपस्या करने लगे।

3 देवी पद्मावती से विवाह

भगवान श्रीनिवास ने राजा आकाशराजु की पुत्री पद्मावती से विवाह किया। इस विवाह हेतु उन्होंने कुबेर से ऋण लिया, जिसे चुकाने के लिए आज भी भक्त दान करते हैं—ऐसी मान्यता है।


मंदिर का निर्माण और स्थापत्य कला

🔹 प्राचीन निर्माण

मंदिर के गर्भगृह का प्रारंभिक स्वरूप लगभग 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व का माना जाता है।

🔹 चोल और संगम काल

  • प्रथम प्राकारम का निर्माण

  • द्रविड़ स्थापत्य शैली का विकास

  • मुख्य द्वारों और मंडपों का निर्माण

🔹 विजयनगर साम्राज्य का योगदान

राजा कृष्णदेवराय के काल में मंदिर को भव्य स्वरूप मिला:

  • स्वर्ण मंडित आनंद निलयम

  • विशाल गोपुरम

  • अनेक मंडप

  • भूमि, सोना और रत्नों का दान

आज मंदिर का अधिकांश स्वरूप इसी युग की देन है।


बालाजी की प्रतिमा से जुड़े रहस्य

  • मूर्ति स्वयंभू मानी जाती है

  • मूर्ति पर पसीने जैसी नमी देखी जाती है

  • गर्भगृह के पीछे समुद्र जैसी शंखध्वनि

  • नेत्र सदैव चंदन से ढके रहते हैं

  • दाईं ओर पट्टी—भृगु मुनि की घटना से जुड़ी


मंदिर के प्रमुख भाग

  • गर्भगृह – स्वयंभू प्रतिमा

  • आनंद निलयम – स्वर्ण मंडप

  • ध्वजस्तंभ – उत्सव आरंभ का प्रतीक

  • कल्याण मंडपम – विवाह उत्सव स्थल


परंपराएँ और प्रमुख उत्सव

  • सुप्रभातम सेवा

  • थोमाला सेवा

  • विशेष पूजा

  • कल्याणोत्सव

  • ब्रह्मोत्सवम (सबसे प्रमुख)

ब्रह्मोत्सवम 9 दिनों तक चलता है और इसमें लाखों भक्त भाग लेते हैं।


तिरुपति लड्डू – विश्व प्रसिद्ध प्रसाद

  • TTD द्वारा निर्मित

  • GI Tag प्राप्त

  • शुद्ध घी, बेसन और मेवों से तैयार

मूल्य:

  • छोटा लड्डू – ₹50

  • बड़ा लड्डू – ₹200


दर्शन के मार्ग

1 दिव्य दर्शन (पैदल मार्ग)

  • अलीपिरी मेट्टू – 3550 सीढ़ियाँ

  • श्रीवारी मेट्टू – 2400 सीढ़ियाँ

2 विशेष प्रवेश दर्शन – ₹300

TTD की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन बुकिंग उपलब्ध।

3 सर्वदर्शन

निःशुल्क दर्शन, सभी के लिए खुला।


तिरुपति से तिरुमला परिवहन

  • TTD बस सेवा (24×7)

  • हर 5–10 मिनट में बस

  • किराया लगभग ₹120

  • मार्ग में निःशुल्क भोजन व चिकित्सा सुविधा


आवास व्यवस्था (Accommodation)

TTD द्वारा तिरुमला और तिरुपति में:

  • ₹100 से ₹5000+ तक कमरे

  • ऑनलाइन बुकिंग उपलब्ध


मंदिर विश्व का सबसे धनी क्यों?

  • विशाल स्वर्ण भंडार

  • करोड़ों रुपये का दैनिक दान

  • लड्डू प्रसाद की व्यापक व्यवस्था

  • TTD की पारदर्शी आर्थिक प्रणाली


निष्कर्ष

श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और चमत्कार का जीवंत केंद्र है। यही कारण है कि यह मंदिर युगों से भक्तों की श्रद्धा का प्रमुख तीर्थ बना हुआ है और आज भी विश्व के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।

Tirumala और Tirupati में TTD द्वारा:


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