अवंतिका शक्तिपीठ, भैरव पर्वत, उज्जैन

परिचय
अवंती भैरव पर्वत, उज्जैन का एक अत्यंत प्राचीन शाक्त-तांत्रिक शक्ति-उपासना केंद्र है, जिसे अवंतिका शक्तिपीठ, भैरव पर्वत अथवा भैरव शिखर के नाम से जाना जाता है।
यह पावन स्थल उज्जैन (प्राचीन अवन्ती महाजनपद), शिप्रा नदी, महाकाल वन तथा कालभैरव परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है।
यह स्थान शक्ति और भैरव की संयुक्त उपासना का एक दुर्लभ एवं सिद्ध केंद्र माना जाता है।
1. वेदों में अवंती (उज्जैन) का संदर्भ
वेदों में उज्जैन का प्रत्यक्ष नाम नहीं मिलता, किंतु अवन्ती क्षेत्र का उल्लेख स्पष्ट रूप से प्राप्त होता है।
ऋग्वेद
ऋग्वेद में अवन्ती/अवन्ती को “देव-यात्रा मार्गों के बीच स्थित पवित्र मध्य-देश” के रूप में वर्णित किया गया है
(ऋग्वेद 3/53–56 के मध्य-देश वर्णन के आधार पर)।
बाद के ब्राह्मण ग्रंथों में उज्जैन स्थित शिप्रा नदी को
“कृष्णवहा, शिप्रा समान तीर्थ” कहा गया है।
अथर्ववेद
अथर्ववेद में भैरव, क्षेत्रपाल और गणपूजित देवताओं का प्रत्यक्ष संदर्भ मिलता है।
अवंती क्षेत्र को एक रक्षा-देव क्षेत्र माना गया, जो आगे चलकर भैरव पर्वत परंपरा का आधार बना।
2. पुराणों में अवंती और भैरव पर्वत
अवन्ती (उज्जैन) को लगभग सभी प्रमुख पुराणों में तीर्थ-राज कहा गया है।
स्कंद पुराण — अवंतिकाखंड (मुख्य आधार)
स्कंद पुराण का अवंतिकाखंड अवंती और उसके पर्वतों का सबसे प्रामाणिक वर्णन प्रस्तुत करता है।
अवंतिकाखंड के अनुसार:
महाकाल वन को ब्रह्मा का ऋषि-क्षेत्र कहा गया है
भैरव को पूरे अवंती क्षेत्र का कर्ता, पालक और रक्षक बताया गया है
अवंती को देवी-तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र माना गया है
उल्लेख मिलता है:
“भैरव इस अवंतिका का रक्षक है, यहाँ उसका शिखर (पर्वत) अत्यंत शक्तिमान है।”
यही भैरव पर्वत का पौराणिक आधार है।
कालिका पुराण
सभी शक्तिपीठों का वर्णन
अवंती शक्तिपीठ का उल्लेख
यहाँ माता सती का ऊपरी ओष्ठ (Upper Lip) गिरने की मान्यता
भैरव — लम्बकर्ण भैरव / काल भैरव
इस प्रकार यह स्थान शक्ति-पीठ + भैरव-पीठ दोनों माना जाता है।
तंत्र-चूड़ामणि तंत्र
51 शक्तिपीठों की सूची में “अवन्ती” का उल्लेख
देवी — अवंती
भैरव — लम्बकर्ण भैरव
यह भैरव पर्वत को अवंती शक्तिपीठ से जोड़ने वाला प्रमुख तांत्रिक प्रमाण है।
वामन पुराण
अवंतिका को सप्त-पवित्र नगरों में गिना गया
देवी और भैरव उपासना को यहाँ का मूल धर्म कहा गया
अवंती को “माता का निवास-भूमि” बताया गया
3. माता सती का अंग-खंड — शक्तिपीठ का आधार
विभिन्न ग्रंथों के अनुसार:
| ग्रंथ | वर्णन |
|---|---|
| कालिका पुराण | माता सती का ऊपरी ओष्ठ |
| तंत्र-चूड़ामणि | ओष्ठ / अधर |
| देवी भागवत | देवी का एक अंग-खंड |
| स्कंद पुराण | देवी का अधिष्ठान |
अतः:
अवंती भैरव पर्वत, उज्जैन = अवंती शक्तिपीठ
4. भैरव पर्वत का महत्व
क्षेत्रपाल भैरव का मुख्य स्थान
स्कंद पुराण और तंत्र ग्रंथों के अनुसार,
भैरव अवंतिका क्षेत्र के प्रधान रक्षक देवता हैं और भैरव पर्वत उनका ऊर्जा-केंद्र है।
तांत्रिक साधना स्थल
यहाँ निम्न साधनाएँ की जाती हैं:
कौलाचार
वामाचार
तंत्र-साधना
योगिनी उपासना
इनका उल्लेख रुद्रयामल एवं कौलागम ग्रंथों में मिलता है।
देवी-भैरव संयुक्त शक्ति-स्थान
अवन्ती देवी + लम्बकर्ण भैरव
यह संयोजन शक्ति-तंत्र में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।
5. मंदिर और पारंपरिक मान्यताएँ
यह स्थल सिद्ध-भूमि माना जाता है
संकल्प-सिद्धि एवं भय-नाश हेतु विशेष पूजा
“महा-माया शक्ति” का केंद्र
दुर्गा सप्तशती, भैरव कवच एवं अथर्व भैरव तंत्र का पाठ
6. अवंती भैरव पर्वत कैसे पहुँचें
रेलवे स्टेशन:
उज्जैन जंक्शन – लगभग 7–12 किमी
हवाई अड्डा:
देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट, इंदौर – 55–70 किमी
सड़क मार्ग:
उज्जैन शहर से टैक्सी/ऑटो द्वारा
7. पूजा एवं दर्शन समय
प्रातःकाल – स्नान, अर्घ्य, शक्ति-पूजन
संध्या – आरती, दीप-दान
नवरात्रि, भैरवाष्टमी, कालरात्रि – विशेष महत्व
8. आसपास के प्रमुख धार्मिक स्थल
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
काल भैरव मंदिर
हरसिद्धि शक्तिपीठ
संदीपनी आश्रम
रामघाट (शिप्रा तट)
9. आधिकारिक एवं विश्वसनीय संदर्भ
10. आंतरिक लिंक
सूचना
यह जानकारी वेदों, पुराणों, तंत्र ग्रंथों एवं सार्वजनिक धार्मिक स्रोतों पर आधारित है।
किसी भी यात्रा या साधना से पूर्व स्थानीय अथवा आधिकारिक स्रोत से पुष्टि अवश्य करें।


