बहुला शक्तिपीठ, बर्धमान (पश्चिम बंगाल)

बहुला शक्तिपीठ, बर्धमान (पश्चिम बंगाल)

परिचय

बहुला शक्तिपीठ, पश्चिम बंगाल के केतुग्राम (Ketugram), बर्धमान जिले में स्थित 51 प्रमुख शक्तिपीठों में से एक अत्यंत प्राचीन एवं पौराणिक स्थल है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहीं माता सती का बायाँ हाथ (Left Arm) गिरा था, जिसके कारण यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।

यहाँ देवी का स्वरूप “माँ बहुला” के रूप में पूजित है, जो करुणा, मातृत्व, पवित्रता और रक्षा-शक्ति की प्रतीक मानी जाती हैं।


वेद–पुराण एवं तांत्रिक ग्रंथों में बहुला शक्तिपीठ

बहुला शक्तिपीठ का उल्लेख देवी भागवत पुराण, तंत्र चूड़ामणि, कालिका पुराण, स्कंद पुराण तथा स्थानीय परंपराओं में मिलता है।

देवी भागवत पुराण

देवी भागवत पुराण के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के वियोग में तांडव कर रहे थे, तब सृष्टि की रक्षा हेतु भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र द्वारा माता सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित किया।
जहाँ-जहाँ ये अंग गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई।

बहुला शक्तिपीठ में गिरा अंग:
➡ माता सती का बायाँ हाथ (Left Arm)


तंत्र चूड़ामणि

तंत्र चूड़ामणि में बहुला पीठ को एक रक्षा-शक्ति केंद्र बताया गया है।
मान्यता है कि यहाँ की साधना से भय, रोग, बाधा एवं मानसिक तनाव में शांति मिलती है।

  • देवी: माँ बहुला

  • भैरव: बिरीनाथ भैरव

  • इस पीठ को “Sarva Raksha Shakti” कहा गया है।


कालिका पुराण

कालिका पुराण में बहुला शक्तिपीठ को
“दिव्य करुणा के अवतरण का स्थल” कहा गया है।

यहाँ देवी के स्वरूप को:

  • करुणामयी

  • दयालु

  • परिवार एवं संतान की रक्षा करने वाली शक्ति

के रूप में वर्णित किया गया है।


स्कंद पुराण और क्षेत्रीय मान्यता

स्कंद पुराण के अनुसार, केतुग्राम क्षेत्र प्राचीन काल में केतु ऋषि का तपस्थल था।
माता सती के बाएँ हाथ के गिरने से यह भूमि रक्षा-शक्ति से परिपूर्ण मानी जाने लगी।


बहुला गाय की प्रसिद्ध कथा

स्थानीय परंपरा में “बहुला गाय” की कथा अत्यंत प्रसिद्ध है।
कथा के अनुसार, एक गाय अपने बछड़े की रक्षा के लिए स्वयं को नाग के सामने समर्पित कर देती है।
उसकी निःस्वार्थ मातृत्व भावना से नाग भी द्रवित हो जाता है।

इसी करुणा और मातृत्व शक्ति को देवी बहुला के स्वरूप से जोड़ा जाता है, और यही इस शक्तिपीठ की पहचान बनी।


देवी का स्वरूप

  • अत्यंत करुणामयी और शांत

  • अभय एवं वरद मुद्रा

  • मातृत्व और रक्षा-शक्ति की प्रतीक

  • साथ में बिरीनाथ भैरव

यह स्वरूप माँ की निःस्वार्थ रक्षा-शक्ति को दर्शाता है।


मंदिर का इतिहास और संरचना

बहुला शक्तिपीठ का मंदिर शाक्त एवं तांत्रिक परंपरा दोनों से जुड़ा हुआ है।
मंदिर परिसर में निम्न प्रमुख स्थल स्थित हैं:

  • गर्भगृह (मूल शक्तिपीठ)

  • अखंड शक्ति धूनी

  • बिरीनाथ शिव मंदिर

  • बहुला कुंड


बहुला शक्तिपीठ में पूजा के लाभ

  • परिवार एवं संतान की रक्षा

  • घर में सुख-शांति

  • भय एवं मानसिक तनाव से मुक्ति

  • रोगों से रक्षा

  • कार्यों में सफलता


बहुला शक्तिपीठ कैसे पहुँचें

निकटतम रेलवे स्टेशन:
कटवा जंक्शन

निकटतम हवाई अड्डा:
कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा

सड़क मार्ग:
कटवा → केतुग्राम → बहुला शक्तिपीठ


आधिकारिक एवं विश्वसनीय संदर्भ


आंतरिक लिंक


संक्षिप्त जानकारी

तत्वविवरण
शक्ति-अंगमाता सती का बायाँ हाथ
देवीमाँ बहुला
भैरवबिरीनाथ
स्थानकेतुग्राम, बर्धमान, पश्चिम बंगाल
परंपराशाक्त एवं तांत्रिक
शक्तिपीठ51 में से एक

सूचना

यह जानकारी धार्मिक ग्रंथों, सार्वजनिक स्रोतों एवं प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है।
किसी भी यात्रा या धार्मिक अनुष्ठान से पूर्व स्थानीय अथवा आधिकारिक स्रोत से जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।

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