सावित्री / भद्रकाली शक्तिपीठ कुरुक्षेत्र, हरियाणा – माता सती का दाहिना टखना पीठ

परिचय: भद्रकाली शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व
कुरुक्षेत्र में स्थित भद्रकाली शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों की परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में वर्णित किया जाता है।
पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं के अनुसार, यह स्थान देवी सती से जुड़ी कथा के कारण विशेष श्रद्धा का केंद्र माना जाता है।
यह मंदिर महाभारत से जुड़ी पावन भूमि पर स्थित है, जिस कारण इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
भद्रकाली शक्तिपीठ की भौगोलिक स्थिति
भद्रकाली (देवीकोप) मंदिर कुरुक्षेत्र शहर से लगभग 3 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित है। यह स्थल दिल्ली-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
निकटवर्ती स्थल
ब्रह्म सरोवर
ज्योतिसर (गीता उपदेश स्थल)
सूर्य कुंड
पौराणिक संदर्भ और उत्पत्ति
शक्तिपीठ परंपरा के अनुसार, दक्ष यज्ञ की कथा में देवी सती के अंगों के विभिन्न स्थानों पर प्रतिष्ठित होने का उल्लेख मिलता है।
इन्हीं परंपरागत वर्णनों में कुरुक्षेत्र स्थित देवीकोप क्षेत्र को भद्रकाली शक्तिपीठ से जोड़ा गया है।
यह विवरण पौराणिक ग्रंथों और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मंदिर का संबंध गुर्जर-प्रतिहार काल से बताया जाता है
18वीं शताब्दी में बाजीराव पेशवा के समय जीर्णोद्धार
मराठा काल में मंदिर परिसर का विस्तार
आधुनिक काल में राज्य सरकार द्वारा सौंदर्यीकरण
इन विभिन्न कालखंडों में मंदिर को धार्मिक संरक्षण प्राप्त होता रहा है।
वास्तुकला और संरचना
भद्रकाली मंदिर की संरचना नागर शैली से जुड़ी मानी जाती है।
प्रमुख विशेषताएँ
ऊँचा नागर शिखर
पत्थर से निर्मित गर्भगृह
देवी भद्रकाली की प्रतिष्ठित प्रतिमा
मंदिर परिसर में स्थित देवीकोप कुंड
दीवारों और संरचना में महाभारत काल से जुड़े दृश्यात्मक संकेत देखे जा सकते हैं।
धार्मिक परंपराएँ और आयोजन
भद्रकाली शक्तिपीठ में वर्ष भर विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं, जो स्थानीय और दूर-दराज़ से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े होते हैं।
प्रमुख अवसर
नवरात्रि – विशेष पूजा और जागरण
महाभारत जयंती – सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन
अमावस्या एवं विशेष तिथियों पर दर्शन
सभी आयोजन श्रद्धा, परंपरा और धार्मिक विश्वास के अंतर्गत होते हैं।
दर्शन व्यवस्था
दर्शन समय: प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक
आरती: प्रातः और सायं
सामान्य दर्शन निःशुल्क
नवरात्रि के समय विशेष व्यवस्था
यात्रा मार्ग और ठहराव
कैसे पहुँचे
हवाई मार्ग: चंडीगढ़ एयरपोर्ट (लगभग 110 किमी)
रेल मार्ग: कुरुक्षेत्र जंक्शन (लगभग 3 किमी)
सड़क मार्ग: NH-44 द्वारा दिल्ली, अंबाला, चंडीगढ़ से सीधा संपर्क
आवास
हरियाणा पर्यटन (HTDC) होटल
धर्मशालाएँ एवं स्थानीय होटल
आसपास के दर्शनीय स्थल
ब्रह्म सरोवर
ज्योतिसर
श्रीकृष्ण संग्रहालय
कुरुक्षेत्र महाभारत सर्किट के अन्य तीर्थ
यात्रा संबंधी सुझाव
नवरात्रि में अधिक भीड़ रहती है, समय प्रबंधन रखें
मंदिर की मर्यादा के अनुरूप वस्त्र पहनें
स्थानीय नियमों और परंपराओं का सम्मान करें
निष्कर्ष
भद्रकाली (सावित्री / देवीकोप) शक्तिपीठ कुरुक्षेत्र की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है।
यह स्थान महाभारत भूमि की विरासत, शक्ति उपासना और भारतीय सनातन संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है।
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