नंदिनी / नंदिकेश्वरी शक्ति पीठ – बीरभूम का दिव्य शक्तिधाम

नंदिनी / नंदिकेश्वरी शक्ति पीठ – बीरभूम का दिव्य शक्तिधाम

नंदिनी / नंदिकेश्वरी शक्ति पीठ

स्थान, इतिहास और बंगाली सांस्कृतिक विरासत

स्थान परिचय

नंदिनी / नंदिकेश्वरी शक्ति पीठ पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के सैनथिया नगर (प्राचीन नाम: नंदीपुर) में स्थित एक प्राचीन शाक्त परंपरा से जुड़ा धार्मिक स्थल माना जाता है। यह मंदिर मयूराक्षी नदी के तट के समीप स्थित है, जिससे इसका प्राकृतिक और सांस्कृतिक वातावरण विशेष बनता है।

  • कोलकाता से दूरी: लगभग 220 किमी (NH-19 द्वारा)

  • निकटतम रेलवे स्टेशन: सैनथिया जंक्शन (लगभग 1 किमी)

शाक्त परंपरा में स्थान

शाक्त ग्रंथों और लोक-परंपराओं के अनुसार, नंदिकेश्वरी शक्ति पीठ को 51 शक्तिपीठों में एक माना जाता है।
कुछ शास्त्रीय परंपराओं में इसे माता सती के गले के आभूषण (हार/कंठहार) से संबद्ध बताया गया है।
यह विवरण धार्मिक मान्यता के रूप में समझा जाना चाहिए, न कि ऐतिहासिक या वैज्ञानिक तथ्य के रूप में।

साथ ही यहाँ नंदीकेश्वर भैरव को देवी के संग रक्षक स्वरूप में पूजा जाता है।

भौगोलिक महत्व – मयूराक्षी नदी

मयूराक्षी नदी बीरभूम क्षेत्र की प्रमुख नदियों में से एक है, जो आसपास के जिलों की कृषि और जीवन-शैली से जुड़ी रही है।

  • मानसून में नदी का प्रवाह बढ़ जाता है

  • शीतकाल में नदी तट शांत और सुलभ रहता है

  • तटवर्ती क्षेत्र में आम, पीपल, बरगद जैसे वृक्ष पाए जाते हैं

भक्त प्रायः नदी तट दर्शन के बाद मंदिर में पूजा करते हैं।

मंदिर परिसर का स्वरूप

मंदिर परिसर में पारंपरिक बंगाली शिखर शैली दिखाई देती है।

मुख्य संरचनाएँ:

  • नंदिकेश्वरी देवी का गर्भगृह

  • नंदीकेश्वर भैरव मंदिर

  • हनुमान मंदिर

  • प्राचीन तालाब और बरगद वृक्ष

देवी प्रतिमा को स्थानीय परंपरा में स्वयंभू स्वरूप माना जाता है, जिसे सिंदूर और पुष्पों से सजाया जाता है।

बंगाली संस्कृति और उत्सव

दुर्गा पूजा (शारदीय नवरात्रि)

दुर्गा पूजा के समय यह क्षेत्र भक्ति और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन जाता है।
धुनुची नृत्य, ढाक वादन और शास्त्रीय पाठ स्थानीय परंपरा का हिस्सा हैं।

काली पूजा

कार्तिक अमावस्या के समय काली पूजा के अवसर पर दीप प्रज्वलन और रात्रिकालीन पूजा की परंपरा निभाई जाती है, जिसे सांस्कृतिक आस्था के रूप में देखा जाता है।

यहाँ होने वाले सभी अनुष्ठान परंपरागत और प्रतीकात्मक हैं।

मेला और लोकजीवन

त्योहारों के समय मंदिर परिसर के आसपास स्थानीय मेला लगता है, जहाँ पारंपरिक बंगाली व्यंजन, हस्तशिल्प और पूजा सामग्री उपलब्ध रहती है।
यह मेला सामाजिक समरसता और लोक-संस्कृति का उदाहरण माना जाता है।

कैसे पहुँचें

सड़क मार्ग:
कोलकाता → दुर्गापुर → आसनसोल → सैनथिया

रेल मार्ग:
हावड़ा–मालदा / हावड़ा–रामपुरहाट मार्ग,
स्टेशन: सैनथिया जंक्शन

वायु मार्ग:
नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, कोलकाता

महत्त्वपूर्ण

अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं और लोक-मान्यताओं पर आधारित है। इसमें किसी प्रकार के चमत्कार, गारंटी या भय उत्पन्न करने का दावा नहीं किया गया है। सामग्री केवल सूचना एवं सांस्कृतिक विरासत के उद्देश्य से प्रस्तुत है।

निष्कर्ष

नंदिनी / नंदिकेश्वरी शक्ति पीठ पश्चिम बंगाल की शाक्त परंपरा, लोक-संस्कृति और धार्मिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
यह स्थल भक्ति, संस्कृति और सामाजिक जीवन के संतुलित सह-अस्तित्व का प्रतीक माना जाता है।

इस शक्तिपीठ का महत्व आस्था और परंपरा से जुड़ा है, जिसे व्यक्तिगत विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए।

यहाँ की यात्रा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण, सांस्कृतिक अनुभव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ती है, बिना किसी भय, गारंटी या अतिशयोक्ति के।

श्री केदारनाथ धाम | विकिपीडिया – नंदिकेश्वरी शक्ति पीठ | Sharma Ji Ki Yatra – विश्व प्रसिद्ध मंदिर

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