सर्वशैल / राकिणी शक्तिपीठ, ईस्ट गोदावरी – गोदावरी तीर शक्तिपीठ राजमहेंद्रवरम (सर्वशैल शक्तिपीठ)

परिचय: सर्वशैल शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व
सर्वशैल शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों की परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में वर्णित किया जाता है।
यह शक्तिपीठ गोदावरी नदी के तट पर स्थित माना जाता है और शक्ति उपासना, तांत्रिक परंपरा तथा भक्ति मार्ग से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में इसका विशेष स्थान है।
धार्मिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं में सर्वशैल शक्तिपीठ का उल्लेख श्रद्धा, साधना और सांस्कृतिक परंपरा के केंद्र के रूप में मिलता है।
सर्वशैल शक्तिपीठ की भौगोलिक स्थिति
सर्वशैल शक्तिपीठ आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिला में, राजमहेंद्रवरम (राजमुंदरी) के निकट गोदावरी नदी के दाहिने तट पर स्थित माना जाता है।
यह स्थल कोटिलिंगेश्वर मंदिर परिसर से जुड़ा हुआ बताया जाता है।
निकटतम यात्रा केंद्र
हवाई मार्ग: राजमहेंद्रवरम एयरपोर्ट (लगभग 15 किमी)
रेल मार्ग: राजमहेंद्रवरम जंक्शन (लगभग 5 किमी)
सड़क मार्ग: NH-16 द्वारा विजयवाड़ा एवं विशाखापत्तनम से संपर्क
सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से फरवरी
पौराणिक संदर्भ और उत्पत्ति
शक्तिपीठ परंपरा के अनुसार, दक्ष यज्ञ की कथा से जुड़े प्रसंगों में देवी सती के अंगों के विभिन्न स्थानों पर प्रतिष्ठित होने का उल्लेख मिलता है।
इन्हीं धार्मिक वर्णनों में गोदावरी तट के इस क्षेत्र को राकिणी देवी से संबद्ध सर्वशैल शक्तिपीठ के रूप में जोड़ा गया है।
यह विवरण पौराणिक ग्रंथों, तंत्र साहित्य और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पूर्वी चालुक्य काल में इस क्षेत्र को धार्मिक संरक्षण
भक्ति आंदोलन काल में गोदावरी तट का सांस्कृतिक विकास
कोटिलिंगेश्वर क्षेत्र का उल्लेख मध्यकालीन स्रोतों में
इन कालखंडों में सर्वशैल क्षेत्र शक्ति उपासना और नदी-आधारित तीर्थ परंपरा से जुड़ा रहा।
वास्तुकला और स्थल स्वरूप
सर्वशैल शक्तिपीठ क्षेत्र की संरचना में दक्षिण भारतीय (द्रविड़) स्थापत्य परंपरा के तत्व देखे जाते हैं।
प्रमुख विशेषताएँ
द्रविड़ शैली का गोपुरम
गर्भगृह में राकिणी देवी से जुड़ा पूजन स्थल
समीप स्थित कोटिलिंगेश्वर क्षेत्र
गोदावरी तट के घाट
यह पूरा परिसर धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है।
धार्मिक परंपराएँ और आयोजन
सर्वशैल शक्तिपीठ में विभिन्न धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं।
प्रमुख अवसर
नवरात्रि – देवी उपासना और विशेष पूजा
गोदावरी पुष्कर काल – नदी-आधारित धार्मिक आयोजन
अमावस्या एवं पर्व तिथियाँ
सभी आयोजन श्रद्धा, परंपरा और धार्मिक विश्वास के अंतर्गत होते हैं।
दर्शन व्यवस्था
दर्शन समय: प्रातः 4:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक
आरती: प्रातः, मध्याह्न और सायं
सामान्य दर्शन निःशुल्क
पर्व काल में विशेष व्यवस्थाएँ
यात्रा मार्ग और आवास
कैसे पहुँचे
विशाखापत्तनम से लगभग 180 किमी
विजयवाड़ा से लगभग 140 किमी
ठहरने की सुविधा
APTDC होटल
धर्मशालाएँ एवं स्थानीय होटल
आसपास के दर्शनीय स्थल
राजमहेंद्रवरम शहर
गोदावरी नदी के घाट
कोटिलिंगेश्वर मंदिर परिसर
गोदावरी तीर्थ सर्किट के अन्य स्थल
यात्रा संबंधी सुझाव
पुष्कर काल में अधिक भीड़ रहती है
स्थानीय प्रशासन और मंदिर नियमों का पालन करें
नदी और मंदिर परिसर की मर्यादा बनाए रखें
निष्कर्ष
सर्वशैल (राकिणी) शक्तिपीठ गोदावरी तट की धार्मिक, तांत्रिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शक्ति-स्थल माना जाता है।
यह स्थान श्रद्धा, साधना और दक्षिण भारतीय शक्ति उपासना की परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है।
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