सुगंधा शक्तिपीठ शिकारपुर बांग्लादेश – सती नासिका पीठ का सुगंधमय धाम

सुगंधा शक्तिपीठ शिकारपुर बांग्लादेश – सती नासिका पीठ का सुगंधमय धाम

सुगंधा शक्तिपीठ का परिचय

सुगंधा शक्तिपीठ बांग्लादेश के बरीसाल (बरिशाल) डिवीजन में स्थित एक प्राचीन शक्तिपीठ माना जाता है। यह स्थल सुगंधा नदी के तट पर बसे शिकारपुर गाँव के निकट स्थित है। पौराणिक परंपराओं के अनुसार, यह शक्तिपीठ देवी सती से जुड़ी कथाओं के कारण विशेष धार्मिक महत्व रखता है। शांत ग्रामीण परिवेश और नदी किनारे स्थित होने के कारण यह स्थान श्रद्धा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।

सुगंधा शक्तिपीठ की भौगोलिक स्थिति

सुगंधा शक्तिपीठ बरीसाल शहर से लगभग 21 किलोमीटर उत्तर में सुगंधा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित माना जाता है। यह क्षेत्र गंगा डेल्टा के निकट होने के कारण नदी-नालों से घिरा हुआ है।

निकटतम यात्रा केंद्र

  • बरीसाल एयरपोर्ट – लगभग 22 किमी

  • बरीसाल रेलवे स्टेशन – लगभग 21 किमी

  • ढाका–बरीसाल हाईवे (NH-860) – सड़क मार्ग

  • नदी मार्ग – सुगंधा नदी से नाव/लॉन्च सेवा

जलवायु

  • नवंबर–फरवरी: मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और अनुकूल

  • जून–अक्टूबर: मानसून के कारण नदी जलस्तर अधिक

  • मार्च–मई: ग्रीष्मकाल में प्रातःकाल यात्रा उपयुक्त

पौराणिक कथाएँ और मान्यताएँ

देवी भागवत, स्कंद पुराण और अन्य ग्रंथों में वर्णित कथाओं के अनुसार, दक्ष यज्ञ की घटना के बाद सती के अंगों के विभिन्न स्थानों पर गिरने की परंपरा से शक्तिपीठों की स्थापना मानी जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि सुगंधा शक्तिपीठ का संबंध सती की नासिका (नाक) से जोड़ा जाता है, जिससे “सुगंधा” नाम प्रचलित हुआ।

स्थानीय परंपराओं में देवी को सुनंदा नाम से भी स्मरण किया जाता है तथा भैरव स्वरूप के रूप में त्र्यंबक भैरव की मान्यता पाई जाती है। ये सभी विवरण आस्था और पौराणिक परंपरा पर आधारित हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इतिहासकारों और स्थानीय अभिलेखों के अनुसार:

  • प्राचीन काल में यह क्षेत्र शक्ति उपासना से जुड़ा माना जाता रहा

  • मुगल और औपनिवेशिक काल में यह एक ग्रामीण तीर्थ के रूप में जाना जाता था

  • 20वीं शताब्दी में मंदिर परिसर का पुनर्संरक्षण और विकास हुआ

आज यह शक्तिपीठ बांग्लादेश के प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।

वास्तुकला और संरचना

सुगंधा शक्तिपीठ की संरचना पारंपरिक बंगाली स्थापत्य शैली से प्रभावित मानी जाती है।
मुख्य विशेषताएँ:

  • गर्भगृह में देवी सुनंदा की प्रतिमा

  • समीप त्र्यंबक भैरव का स्थान

  • सुगंधा नदी के किनारे घाट

  • साधारण किंतु पारंपरिक मंदिर परिसर

मंदिर की दीवारों और सजावट में स्थानीय कला शैली की झलक देखी जाती है।

धार्मिक परंपराएँ और आयोजन

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, यहाँ नवरात्रि, अमावस्या और दुर्गा पूजा के समय विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
श्रद्धालु देवी दर्शन, आरती और सामूहिक पूजा में भाग लेते हैं।

ये सभी गतिविधियाँ धार्मिक आस्था और परंपरा से संबंधित हैं, न कि किसी निश्चित फल या परिणाम की गारंटी के रूप में।

दर्शन समय

  • सामान्य दर्शन: सुबह 6:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक

  • प्रातः और संध्या आरती

  • विशेष पर्वों पर समय स्थानीय व्यवस्था के अनुसार परिवर्तित हो सकता है

यात्रा मार्ग और ठहराव

  • ढाका से बरीसाल: सड़क या नदी मार्ग

  • कोलकाता से: अंतरराष्ट्रीय यात्रा के बाद बरीसाल पहुँचा जा सकता है

  • ठहराव: बरीसाल शहर में होटल एवं सीमित धर्मशाला विकल्प

(अंतरराष्ट्रीय यात्रा हेतु वैध पासपोर्ट/वीज़ा आवश्यक)

आसपास के धार्मिक स्थल

  • चंद्रनाथ शक्तिपीठ

  • बहुला शक्तिपीठ

  • बांग्लादेश के अन्य प्राचीन देवी मंदिर और तीर्थ

यात्रा से जुड़े सुझाव

  • अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र होने के कारण दस्तावेज साथ रखें

  • मंदिर परिसर और नदी तट पर स्वच्छता व मर्यादा बनाए रखें

  • स्थानीय परंपराओं और नियमों का सम्मान करें

निष्कर्ष

सुगंधा शक्तिपीठ बांग्लादेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शक्तिपीठ माना जाता है। यह स्थल पौराणिक मान्यताओं, नदी किनारे के शांत वातावरण और पारंपरिक उपासना पद्धतियों के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

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