विशालाक्षी शक्तिपीठ वाराणसी – काशी का नेत्र पीठ

विशालाक्षी शक्तिपीठ वाराणसी – काशी का नेत्र पीठ
विशालाक्षी शक्तिपीठ का परिचय

विशालाक्षी शक्तिपीठ की भौगोलिक स्थिति

विशालाक्षी शक्तिपीठ गंगा के मणिकर्णिका घाट के निकट मीर घाट पर बसा है।
वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर से थोड़ी दूरी पर स्थित है।
इसके अलावा अन्नपूर्णा मंदिर के पास ही अवस्थित है।

परिणामस्वरूप काशी तीर्थराज का अभिन्न अंग बन गया।
साथ ही दक्षिण भारतीय शैली का मंदिर है।
विशेष रूप से वाराणसी घाट संस्कृति का प्रतीक है।

विशालाक्षी शक्तिपीठ की पौराणिक कथा

विशालाक्षी शक्तिपीठ में सती कुंडल

पुराणों के अनुसार माता सती का दाहिना कान का कुंडल यहाँ गिरा था।
कहा जाता है देवी पुराण में इसका स्पष्ट उल्लेख है।
मान्यता है विशालाक्षी माता अन्नपूर्णा रूप में प्रकट हुईं।

इसलिए ऋषि व्यास को भोजन प्रदान किया था।
इसके अलावा स्कंद पुराण में विस्तृत कथा वर्णित है।
अंततः शक्ति पीठ के रूप में स्थापित हुआ।

विशालाक्षी शक्तिपीठ का ऐतिहासिक महत्व

विशालाक्षी शक्तिपीठ का निर्माण काल

प्राचीन काल से काशी शक्ति उपासना का केंद्र रहा।
वहीं दूसरी ओर 1908 में नटकोट नागर ने पुनर्निर्माण कराया।
परिणामस्वरूप द्रविड़ शैली में भव्य मंदिर बना।

स्पष्ट रूप से दक्षिण भारतीय भक्तों का प्रमुख पीठ है।
साथ ही मीनाक्षी कामाक्षी के साथ त्रिशक्ति बनाता।
अंत में काशी की धार्मिक धरोहर का हिस्सा है।youtube

विशालाक्षी शक्तिपीठ की वास्तुकला

विशालाक्षी शक्तिपीठ का द्रविड़ स्थापत्य

दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली में निर्मित है।
वहीं विशाल नेत्र वाली देवी प्रतिमा आकर्षक है।
इसके अलावा काल भैरव मंदिर निकटवर्ती है।

परिणामस्वरूप गर्भगृह सुंदर सज्जा से युक्त है।
साथ ही फूल सिंदूर से दैनिक पूजा होती है।
विशेष रूप से मंदिर परिसर शांतिप्रद है।

विशालाक्षी शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व

विशालाक्षी शक्तिपीठ में पूजा फल

पुराणों के अनुसार विवाह संतान सुख प्रदान करती है।
कहा जाता है 41 मंगलवार कुमकुम प्रसाद चढ़ाने से मनोरथ सिद्धि।
मान्यता है दुर्भाग्य नाशक शक्ति पीठ है।

इसलिए अविवाहित निःसंतान भक्त आते हैं।
इसके अलावा तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र।
अंततः शिव शक्ति संगम का प्रतीक है।youtube

विशालाक्षी शक्तिपीठ दर्शन समय

विशालाक्षी शक्तिपीठ की आरती व्यवस्था

सुबह 4:30 से रात 10 बजे तक दर्शन सुगम।
वहीं मंगला आरती प्रातः 5 बजे होती है।
इसके अलावा शयन आरती रात्रि 10 बजे।

परिणामस्वरूप संध्या आरती सायं 7 बजे भव्य होती है।
साथ ही भोग आरती दोपहर 12 बजे।
विशेष रूप से नवरात्रि में विशेष दर्शन।

विशालाक्षी शक्तिपीठ कैसे पहुँचें

विशालाक्षी शक्तिपीठ यात्रा मार्ग

स्पष्ट रूप से वाराणसी हवाई अड्डा 25 किमी दूर है।
वहीं दूसरी ओर काशी जंक्शन से 6 किमी ऑटो।
इसके अलावा लाल बहादुर शास्त्री रेलवे स्टेशन निकट।

परिणामस्वरूप घाट तक पैदल या रिक्शा सुगम।
साथ ही काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से आसान पहुँच।
अंत में गंगा स्नान के बाद दर्शन।

विशालाक्षी शक्तिपीठ के आसपास स्थल

विशालाक्षी शक्तिपीठ क्षेत्र दर्शनीय

इसलिए काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग निकट है।
वहीं अन्नपूर्णा मंदिर भोजन दान स्थल।
इसके अलावा मणिकर्णिका घाट मोक्ष स्थल।

परिणामस्वरूप मीर घाट गंगा आरती देखें।
साथ ही काल भैरव मंदिर दर्शन करें।
विशेष रूप से पंचगंगा घाट स्नान योग्य।

विशालाक्षी शक्तिपीठ यात्रा समय

विशालाक्षी शक्तिपीठ सर्वोत्तम मौसम

अक्टूबर से मार्च आदर्श काल है।
वहीं दूसरी ओर नवरात्रि विशेष उत्सव होता।
इसके अलावा गंगा सागर महोत्सव नवंबर में।

परिणामस्वरूप वर्षा में घाट स्नान आकर्षक।
साथ ही ग्रीष्म में भी दर्शन सुगम।
अंततः मौसम अनुसार यात्रा योजना।youtube

विशालाक्षी शक्तिपीठ यात्रा सुझाव

विशालाक्षी शक्तिपीठ भक्तों के लिए

कुमकुम प्रसाद 41 मंगलवार चढ़ाएँ।
वहीं साड़ी चुनरी भेंट करें मनोकामना सिद्धि।
इसके अलावा गंगा स्नान पूर्व सलाह लें।

परिणामस्वरूप पूर्ण दर्शन लाभ मिलेगा।
साथ ही आरती समय का पालन करें।
अंततः काशी वास की कामना करें।


महत्वपूर्ण संसाधन

आंतरिक संसाधन:

बाहरी संसाधन:

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