त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ जालंधर – पंजाब का एकमात्र स्तनपीठ

त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ का परिचय
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ पंजाब के प्रमुख नगर जालंधर में स्थित एक प्राचीन धार्मिक स्थल माना जाता है। यह शक्तिपीठ देवी उपासना से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं और पंजाब की सांस्कृतिक परंपरा के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष सम्मान रखता है। शहरी परिवेश के बीच स्थित होने के बावजूद यह स्थान शांति और श्रद्धा का वातावरण प्रदान करता है।
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ की भौगोलिक स्थिति
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ जालंधर शहर के मध्य भाग में स्थित माना जाता है।
यह जालंधर रेलवे स्टेशन से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर है, जिससे यहाँ पहुँचना सरल रहता है।
मंदिर परिसर के साथ स्थित देवी तालाब (सरोवर) इस स्थल की एक विशिष्ट पहचान मानी जाती है। पास में काली माता मंदिर भी स्थित है, जो क्षेत्र की धार्मिक महत्ता को दर्शाता है।
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ से जुड़ी पौराणिक मान्यताएँ
पौराणिक ग्रंथों और लोकपरंपराओं के अनुसार, इस स्थल को माता सती से संबंधित कथाओं से जोड़ा जाता है।
ऐसा माना जाता है कि देवी त्रिपुरमालिनी का नाम और स्वरूप शक्ति उपासना की परंपरा से जुड़ा हुआ है।
धार्मिक कथाओं में यहाँ भैरव के साथ देवी उपासना का उल्लेख मिलता है। ये सभी विवरण पौराणिक मान्यताओं और श्रद्धालुओं के विश्वास पर आधारित हैं।
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ का ऐतिहासिक महत्व
स्थानीय इतिहास के अनुसार, त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ लंबे समय से शक्तोपासना का केंद्र माना जाता रहा है।
समय-समय पर मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार किया गया, जिससे इसकी संरचना वर्तमान स्वरूप में विकसित हुई।
यह शक्तिपीठ पंजाब की धार्मिक परंपरा और स्थानीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ की वास्तुकला
मंदिर परिसर में स्थित विशाल सरोवर (देवी तालाब) इसकी प्रमुख विशेषता है।
इसके साथ-साथ काली माता मंदिर और अन्य धार्मिक संरचनाएँ परिसर को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करती हैं।
कुल मिलाकर मंदिर की बनावट सरल, सुव्यवस्थित और शांत वातावरण वाली मानी जाती है, जो श्रद्धालुओं को ध्यान और प्रार्थना के लिए उपयुक्त स्थान देती है।
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ देवी-उपासना और शक्ति आराधना से जुड़ा एक प्रमुख स्थल है।
यहाँ विशेष अवसरों पर पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, विशेषकर नवरात्रि के समय।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह स्थान भक्ति, साधना और आध्यात्मिक चिंतन के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करता है। यह सब आस्था और परंपरा के अंतर्गत आता है।
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ दर्शन समय
सामान्य दिनों में: प्रातः 5 बजे से रात्रि 9 बजे तक
मंगला आरती: प्रातः
शयन आरती: सायंकाल
त्योहारों और विशेष अवसरों पर दर्शन समय स्थानीय व्यवस्था के अनुसार बदल सकता है।
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ कैसे पहुँचें
रेल मार्ग: जालंधर रेलवे स्टेशन (लगभग 1 किमी)
हवाई मार्ग: श्री गुरु राम दास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (अमृतसर)
सड़क मार्ग: चंडीगढ़–अमृतसर हाईवे से जालंधर तक सुगम यात्रा
शहर के भीतर ऑटो, टैक्सी और अन्य स्थानीय साधन आसानी से उपलब्ध रहते हैं।
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ के आसपास दर्शनीय स्थल
देवी तालाब सरोवर
काली माता मंदिर
जालंधर संग्रहालय
गुरुद्वारा चोला साहिब
शहर के अन्य सांस्कृतिक और पर्यटन स्थल
ये सभी स्थान जालंधर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं।
यात्रा के लिए उपयुक्त समय
अक्टूबर से मार्च: मौसम अनुकूल
नवरात्रि: विशेष धार्मिक आयोजन
मानसून के समय सरोवर और परिसर का दृश्य आकर्षक माना जाता है
यात्रा से जुड़े सुझाव
भीड़ वाले दिनों में दर्शन के लिए समय से पहले पहुँचना उपयोगी रहता है
मंदिर परिसर और सरोवर क्षेत्र में स्वच्छता और मर्यादा बनाए रखें
स्थानीय परंपराओं और नियमों का सम्मान करें
निष्कर्ष
त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ जालंधर की धार्मिक परंपरा, पौराणिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। यह शक्तिपीठ श्रद्धा, इतिहास और शांति का संगम प्रस्तुत करता है।
महत्वपूर्ण संसाधन
आंतरिक संसाधन:
बाहरी संसाधन:


