श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग – वाराणसी का अविमुक्तेश्वर

श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग – वाराणसी का अविमुक्तेश्वर

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का परिचय

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की भौगोलिक स्थिति

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग दशाश्वमेध घाट के निकट है।
वहीं गंगा नदी के पश्चिमी तट पर विराजमान है।
इसके अलावा मणिकर्णिका घाट से सटा हुआ है।

परिणामस्वरूप वाराणसी की हृदय स्थली कहलाता है।
साथ ही पंचकोशी परिक्रमा का केंद्र है।
विशेष रूप से ज्ञानवापी क्षेत्र में स्थित है।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का शिव पुराण वर्णन

पुराणों के अनुसार शिव ने काशी को त्रिशूल पर धारण किया।
कहा जाता है प्रकृति और पुरुष की तपस्या के लिए नगर रचा।
मान्यता है अविमुक्तेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वयंभू प्रकट हुआ।

इसलिए काशी प्रलय काल में भी अविनाशी रहती है।
इसके अलावा शिव पुराण में विस्तृत कथा है।
अंततः मोक्षदायिनी नगरी कहलाती है।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का ऐतिहासिक महत्व

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का निर्माण काल

प्राचीन काल से काशी तीर्थराज रही।
वहीं दूसरी ओर ११वीं शताब्दी में हरीशचंद्र ने जीर्णोद्धार कराया।
परिणामस्वरूप विक्रमादित्य ने पुनर्निर्माण किया।

स्पष्ट रूप से १७८० में अहिल्याबाई होल्कर ने वर्तमान मंदिर बनवाया।
साथ ही रणजीत सिंह ने सोने का शिखर चढ़ाया।
अंत में ज्ञानवापी कॉरिडोर से सुगम पहुँच हुई।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की वास्तुकला

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का स्थापत्य गुण

श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग नागर शैली में सफेद संगमरमर से निर्मित है।
वहीं सोने का शिखर चमकदार है।
इसके अलावा स्वयंभू ज्योतिर्लिंग गर्भगृह में है।

परिणामस्वरूप ज्ञानवापी कूप विशेष आकर्षण है।
साथ ही प्रदक्षिणा मार्ग सुव्यवस्थित है।
विशेष रूप से मंदिर परिसर विशालकाय है।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग में पूजा विधि

पुराणों के अनुसार काशी मृत्यु भय नाशक है।
कहा जाता है तारक मंत्र कान में फुसफुसाते हैं।
मान्यता है मणिकर्णिका स्नान पुण्यकारी है।

इसलिए भक्त काशी वास चाहते हैं।
इसके अलावा पंचकोशी परिक्रमा फलदायी है।
अंततः शिवशक्ति का आदि केंद्र है।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन समय

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा व्यवस्था

श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग वर्ष भर सुबह ३ से रात ११ दर्शन।
वहीं मंगला आरती प्रातः ३ बजे होती है।
इसके अलावा भोग आरती दोपहर ११ बजे।

परिणामस्वरूप संध्या आरती सायं ७ बजे।
साथ ही शृंगार आरती रात्रि ८:३० बजे।
विशेष रूप से कांवड़ यात्रा में विशेष दर्शन।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग कैसे पहुँचें

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग यात्रा मार्ग

स्पष्ट रूप से लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा निकट है।
वहीं दूसरी ओर वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन ५ किमी दूर।
इसके अलावा देश के सभी प्रमुख शहरों से बसें।

परिणामस्वरूप ऑटो-रिक्शा सुगम परिवहन है।
साथ ही ज्ञानवापी कॉरिडोर से सीधा पहुँच।
अंत में गंगा स्नान के बाद दर्शन विधान।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के आसपास स्थल

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग क्षेत्र दर्शनीय

इसलिए काशी विश्वनाथ कॉरिडोर अवश्य देखें।
वहीं मणिकर्णिका घाट स्नान स्थल है।
इसके अलावा दशाश्वमेध घाट गंगा आरती देखें।

परिणामस्वरूप अन्नपूर्णा मंदिर भोजन दान है।
साथ ही दुर्गा कुंड स्नान योग्य है।
विशेष रूप से पंचकोशी यात्रा प्रारंभ करें।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग यात्रा समय

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग सर्वोत्तम मौसम

अक्टूबर से मार्च आदर्श काल है।
वहीं दूसरी ओर सावन में कांवड़ यात्रा भव्य।
इसके अलावा कुंभ मेला विशेष अवसर।

परिणामस्वरूप ग्रीष्म में भी दर्शन सुगम।
साथ ही वर्षा ऋतु में घाट स्नान आकर्षक।
अंततः मौसम अनुसार यात्रा योजना।

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग यात्रा सुझाव

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग भक्तों के लिए

कांवड़ यात्रा पूर्व योजना बनाएं।
वहीं पंचकोशी परिक्रमा ४० किमी लंबी है।
इसके अलावा गंगा स्नान स्वास्थ्य सलाह लें।

परिणामस्वरूप सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित होगा।
साथ ही स्थानीय परंपराओं का पालन करें।
अंततः काशी वास की कामना करें।


महत्वपूर्ण संसाधन

आंतरिक संसाधन:

बाहरी संसाधन:

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