श्री केदारनाथ धाम – उत्तराखंड का ज्योतिर्लिंग शिवालय

केदारनाथ धाम का परिचय
केदारनाथ धाम की भौगोलिक स्थिति
केदारनाथ धाम समुद्र तल से ३५८४ मीटर ऊँचाई पर है।
वहीं हिमालय की गोद में बसा हुआ है।
इसके अलावा चार धाम यात्रा का दूसरा धाम माना जाता है।
परिणामस्वरूप मंदाकिनी नदी इसके सामने बहती है।
साथ ही चोराबारी ग्लेशियर निकट है।
विशेष रूप से हिमाच्छादित चोटियों से घिरा है।
केदारनाथ धाम की पौराणिक कथा
केदारनाथ धाम में पांडवों की भक्ति
पुराणों के अनुसार पांडवों ने महाभारत युद्ध के पापों का प्रायश्चित किया।
कहा जाता है भगवान शिव बैल रूप धारण कर भागे।
मान्यता है शिवजी का कूबड़ यहीं प्रकट हुआ।
इसलिए स्वयंभू ज्योतिर्लिंग स्थापित हुआ।
इसके अलावा स्कंद पुराण में विस्तृत वर्णन है।
अंततः ज्योतिर्लिंग की उपासना स्थल बन गया।
केदारनाथ धाम का ऐतिहासिक महत्व
केदारनाथ धाम में शंकराचार्य समाधि
प्राचीन काल से तीर्थयात्रियों का केंद्र रहा।
वहीं दूसरी ओर आदि शंकराचार्य ने ८वीं शताब्दी में पुनर्निर्माण कराया।
परिणामस्वरूप वर्तमान मंदिर स्वरूप प्राप्त हुआ।
स्पष्ट रूप से शंकराचार्य समाधि मंदिर के पीछे है।
साथ ही १२वीं शताब्दी में कृत्यकल्पतरु में उल्लेख है।
अंत में चार धाम यात्रा का अभिन्न भाग बना।
केदारनाथ धाम की वास्तुकला
केदारनाथ धाम का विशिष्ट स्थापत्य
केदारनाथ धाम विशाल ग्रेनाइट शिलाओं से निर्मित है।
वहीं उत्तर भारतीय नागर शैली का अनुसरण करता है।
इसके अलावा स्वयंभू शिवलिंग मुख्य देवता है।
परिणामस्वरूप १२० फुट ऊँचा शिखर मनमोहक है।
साथ ही भंडारिदेवी मंदिर निकटवर्ती है।
विशेष रूप से प्राकृतिक शिलाओं पर आधारित है।
केदारनाथ धाम का धार्मिक महत्व
केदारनाथ धाम में ज्योतिर्लिंग पूजा
पुराणों के अनुसार ज्योतिर्लिंग दर्शन मोक्षदायी माना जाता है।
कहा जाता है महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन होते हैं।
मान्यता है चोराबारी ताल स्नान पुण्यकारी है।
इसलिए भक्त कठिन यात्रा को धन्य मानते हैं।
इसके अलावा पंचकेदार यात्रा का प्रथम केंद्र है।
अंततः शिवभक्ति का प्रतीक बन गया।
केदारनाथ धाम दर्शन समय
केदारनाथ धाम की पूजा व्यवस्था
इसलिए अप्रैल से नवंबर तक खुला रहता है।
वहीं सुबह ४ से रात ९ बजे दर्शन सुगम हैं।
इसके अलावा आरती सुबह-शाम निर्धारित समय पर।
परिणामस्वरूप मंदिर समिति व्यवस्था सुव्यवस्थित है।
साथ ही वस्त्र दान की परंपरा प्रचलित है।
विशेष रूप से शीतकाल में ऊखीमठ स्थानांतरित होता है।
केदारनाथ धाम कैसे पहुँचें
केदारनाथ धाम तक यात्रा मार्ग
स्पष्ट रूप से गोविंदघाट से १६ किमी पैदल + हेली।
वहीं दूसरी ओर हरिद्वार से २२९ किमी सड़क मार्ग।
इसके अलावा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा निकट है।
परिणामस्वरूप हेलीकॉप्टर सेवा सुगम है।
साथ ही पोंटिंग ब्रिज पार करना पड़ता है।
अंत में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र आवश्यक है।
केदारनाथ धाम के आसपास स्थल
केदारनाथ धाम क्षेत्र के दर्शनीय स्थान
वासुकी ताल अवश्य देखें।
वहीं चोराबारी ताल प्राकृतिक सौंदर्य है।
इसके अलावा त्रिजुगीनारायण मंदिर निकट है।
परिणामस्वरूप गौरीकुंड स्नान स्थल है।
साथ ही मंदाकिनी घाटी शांतिप्रद है।
विशेष रूप से पंचकेदार यात्रा करें।
केदारनाथ धाम यात्रा समय
केदारनाथ धाम के लिए मौसम सलाह
मई से अक्टूबर सर्वोत्तम काल है।
वहीं दूसरी ओर जून-जुलाई मौसम अनुकूल रहता है।
इसके अलावा मानसून में सावधानी बरतें।
परिणामस्वरूप कम भीड़ में शांत दर्शन संभव।
साथ ही ऊनी वस्त्रों का प्रबंध करें।
अंततः मौसम विभाग की जानकारी लें।
केदारनाथ धाम यात्रा सुझाव
केदारनाथ धाम आने वाले भक्तों के लिए
केदारनाथ धाम आने वाले भक्त चिकित्सा प्रमाण पत्र साथ रखें।
वहीं पर्याप्त जल और ऊर्जा लें।
इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण का पालन करें।
परिणामस्वरूप सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित होगी।
साथ ही स्थानीय परंपराओं का सम्मान करें।
अंततः धीरे-धीरे चढ़ाई करें।


