श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर – खंडवा, मध्य प्रदेश | Omkareshwar Jyotirlinga Temple

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का परिचय
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की भौगोलिक स्थिति
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा के उत्तरी तट पर है।
वहीं ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग दक्षिणी तट पर विराजमान है।
इसके अलावा ओमकार पर्वत द्वीप का निर्माण करता है।
परिणामस्वरूप दोनों ज्योतिर्लिंग दर्शन एक ही माने जाते हैं।
साथ ही खंडवा से ७७ किलोमीटर दूर स्थित है।
विशेष रूप से इंदौर से १४० किलोमीटर की दूरी है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में विन्ध्य तपस्या
पुराणों के अनुसार विन्ध्याचल पर्वत ने शिव की तपस्या की।
कहा जाता है भगवान शिव ओमकार रूप प्रकट हुए।
मान्यता है नर्मदा ने ओम आकार धारण किया।
इसलिए ओंकारेश्वर नाम पड़ा।
इसके अलावा शिव पुराण में विस्तृत वर्णन है।
अंततः मोक्षदायी तीर्थस्थल बन गया।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का ऐतिहासिक महत्व
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में परमार शासन
प्राचीन काल से भील राजाओं का क्षेत्र रहा।
वहीं दूसरी ओर परमार वंश ने संरक्षण दिया।
परिणामस्वरूप ११वीं शताब्दी में शिलालेख मिले।
स्पष्ट रूप से अहिल्याबाई होल्कर ने जीर्णोद्धार कराया।
साथ ही रणजीत सिंह महाराज ने दान दिया।
अंत में ASI संरक्षित स्मारक घोषित हुआ।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की वास्तुकला
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का नागर स्थापत्य
श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर उत्तर भारतीय नागर शैली में निर्मित है।
वहीं ५२ स्तंभों वाला मंडप भव्य है।
इसके अलावा स्वयंभू ज्योतिर्लिंग गर्भगृह में है।
परिणामस्वरूप गर्भगुदा तीर्थ विशेष महत्व रखता है।
साथ ही सिद्धविनायक मंदिर निकटवर्ती है।
विशेष रूप से नर्मदा परिक्रमा मार्ग सुगम है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में शयन आरती
पुराणों के अनुसार शिव तीनों लोक भ्रमण कर यहाँ विश्राम करते हैं।
कहा जाता है शयन आरती विश्वविख्यात है।
मान्यता है नर्मदा स्नान पुण्यकारी है।
इसलिए भक्त परिक्रमा अवश्य करते हैं।
इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा विशेष उत्सव है।
अंततः नर्मदा जयंती पर भव्य आयोजन होता है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन समय
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा व्यवस्था
सुबह ५ से रात ९ बजे दर्शन सुगम।
वहीं मंगला आरती प्रातः ५ बजे।
इसके अलावा शयन आरती रात्रि ८ बजे।
परिणामस्वरूप ममलेश्वर दर्शन भी आवश्यक।
साथ ही अभिषेक पूर्व बुकिंग उपलब्ध।
विशेष रूप से वीआईपी दर्शन सुविधा है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे पहुँचें
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग यात्रा मार्ग
स्पष्ट रूप से इंदौर हवाई अड्डा निकटतम है।
वहीं दूसरी ओर खंडवा रेलवे स्टेशन ७७ किमी दूर।
इसके अलावा भोपाल से २४० किलोमीटर सड़क मार्ग।
परिणामस्वरूप नर्मदा ब्रिज पार कर पहुँचें।
साथ ही बस स्टैंड से १ किमी पैदल।
अंत में नर्मदा परिक्रमा २७ किमी लंबी है।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के आसपास स्थल
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षेत्र दर्शनीय
इसलिए ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग अवश्य देखें।
वहीं गर्भगुदा तीर्थ गुफा महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा सिद्धनाथ मंदिर निकटवर्ती है।
परिणामस्वरूप ११ किमी परिक्रमा मार्ग सुंदर।
साथ ही अन्नपूर्णा मंदिर भोजनालय है।
विशेष रूप से नर्मदा घाट स्नान योग्य हैं।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग यात्रा समय
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग सर्वोत्तम मौसम
अक्टूबर से मार्च आदर्श काल।
वहीं दूसरी ओर कार्तिक मास विशेष महत्व।
इसके अलावा मानसून में नर्मदा सौंदर्य बढ़ता है।
परिणामस्वरूप ग्रीष्म में भी दर्शन सुगम।
साथ ही हल्के ऊनी वस्त्र पर्याप्त।
अंततः परिक्रमा मौसम अनुसार करें।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग यात्रा सुझाव
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भक्तों के लिए
नर्मदा परिक्रमा पूर्व योजना बनाएं।
वहीं आरामदायक जूते साथ रखें।
इसके अलावा पर्याप्त जल संग्रह करें।
परिणामस्वरूप सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित होगी।
साथ ही स्थानीय परंपराओं का सम्मान करें।
अंततः शयन आरती अवश्य देखें।


