श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी तट पर स्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख केंद्र है। लाखों भक्त कठिन पैदल यात्रा कर दर्शन के लिए आते हैं।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का परिचय
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की भौगोलिक स्थिति
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग ३५८४ मीटर ऊँचाई पर स्थित है।
वहीं हिमालय की चोटियों से घिरा हुआ है।
इसके अलावा चार धाम यात्रा का दूसरा धाम माना जाता है।
परिणामस्वरूप मंदाकिनी नदी इसके सामने बहती है।
साथ ही चोराबारी ग्लेशियर निकटवर्ती है।
विशेष रूप से स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग में पांडव भक्ति
पुराणों के अनुसार पांडवों ने युद्ध पापों का प्रायश्चित किया।
कहा जाता है भगवान शिव बैल रूप धारण कर भागे।
मान्यता है कूबड़ भाग यहीं प्रकट हुआ।
इसलिए ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई।
इसके अलावा स्कंद पुराण में वर्णन उपलब्ध है।
अंततः शिवभक्ति का प्रतीक बन गया।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का ऐतिहासिक महत्व
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग में शंकराचार्य योगदान
प्राचीन काल से तीर्थयात्रा प्रचलित रही।
वहीं दूसरी ओर आदि शंकराचार्य ने जीर्णोद्धार कराया।
परिणामस्वरूप ८वीं शताब्दी में वर्तमान स्वरूप मिला।
स्पष्ट रूप से शंकराचार्य समाधि मंदिर पीछे है।
साथ ही कत्यूरी शैली का अनुसरण करता है।
अंत में पंचकेदार का प्रथम धाम बना।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की वास्तुकला
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का स्थापत्य कला
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग विशाल ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित है।
वहीं कत्यूरी शैली में बना हुआ है।
इसके अलावा १२० फुट ऊँचा शिखर भव्य है।
परिणामस्वरूप स्वयंभू शिवलिंग गर्भगृह में है।
साथ ही चारों ओर प्रदक्षिणा पथ सुगम है।
विशेष रूप से अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित रहती है।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग में पूजा विधि
पुराणों के अनुसार ज्योतिर्लिंग दर्शन पुण्यकारी है।
कहा जाता है महाशिवरात्रि विशेष महत्व रखती है।
मान्यता है वासुकी ताल स्नान शुभ है।
इसलिए भक्त कठोर यात्रा धन्य मानते हैं।
इसके अलावा पंचकेदार यात्रा प्रारंभिक बिंदु है।
अंततः आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन समय
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा व्यवस्था
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग अप्रैल से नवंबर तक खुला रहता है।
वहीं सुबह ४ से रात ९ बजे दर्शन होते हैं।
इसके अलावा आरती समय निर्धारित है।
परिणामस्वरूप मंदिर समिति व्यवस्था सुचारू है।
साथ ही घृत अभिषेक विशेष विधि है।
विशेष रूप से ऊखीमठ में शीतकालीन विराजमान रहता है।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग कैसे पहुँचें
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग यात्रा मार्ग
स्पष्ट रूप से गौरीकुंड से १६ किमी पैदल मार्ग।
वहीं दूसरी ओर हरिद्वार से २२९ किमी सड़क।
इसके अलावा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा सुगम है।
परिणामस्वरूप हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है।
साथ ही पोंटिंग ब्रिज पार करना पड़ता है।
अंत में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र आवश्यक है।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के आसपास स्थल
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग क्षेत्र दर्शनीय स्थान
वासुकी ताल झील अवश्य देखें।
वहीं चोराबारी ताल प्राकृतिक सौंदर्य है।
इसके अलावा त्रिजुगीनारायण विवाह स्थल है।
परिणामस्वरूप गौरीकुंड स्नान योग्य है।
साथ ही मंदाकिनी घाटी शांतिपूर्ण है।
विशेष रूप से पंचकेदार यात्रा पूर्ण करें।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग यात्रा समय
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग सर्वोत्तम मौसम
मई से अक्टूबर आदर्श समय है।
वहीं दूसरी ओर जून-जुलाई सुहावना मौसम रहता है।
इसके अलावा मानसून सावधानीपूर्वक यात्रा करें।
परिणामस्वरूप कम यात्रियों में शांत दर्शन मिलते हैं।
साथ ही ऊनी वस्त्र साथ रखें।
अंततः मौसम अपडेट जांचें।
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग यात्रा सुझाव
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग भक्तों के लिए
चिकित्सा प्रमाण पत्र आवश्यक है।
वहीं पर्याप्त जल और ऊर्जा संग्रह करें।
इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण का पालन करें।
परिणामस्वरूप सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित होगी।
साथ ही स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करें।
अंततः धीमी चढ़ाई से स्वास्थ्य सुरक्षित रखें।



