स्वामीनारायण मंदिर, सिलवासा – एक सुव्यवस्थित धार्मिक स्थल

स्वामीनारायण मंदिर, सिलवासा – एक सुव्यवस्थित धार्मिक स्थल

बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर, सिलवासा – आस्था, अनुशासन और सांस्कृतिक परंपरा का केंद्र

बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर, सिलवासा, सिलवासा के अथल क्षेत्र में नारोली मार्ग पर स्थित एक सुव्यवस्थित हिंदू मंदिर है। यह मंदिर स्वामीनारायण परंपरा से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए पूजा, धार्मिक गतिविधियों और सांस्कृतिक आयोजनों का एक संगठित केंद्र माना जाता है।

तेजी से विकसित होते औद्योगिक क्षेत्र सिलवासा में यह मंदिर स्थानीय समुदाय को पारंपरिक धार्मिक वातावरण प्रदान करता है। यहाँ पूजा-अर्चना, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं।

स्वामीनारायण परंपरा की पृष्ठभूमि (ऐतिहासिक संदर्भ)

स्वामीनारायण परंपरा का विकास उन्नीसवीं शताब्दी में हुआ। इस परंपरा में धार्मिक अनुशासन, नैतिक आचरण और सामाजिक जिम्मेदारी पर विशेष ध्यान दिया जाता है। ऐतिहासिक रूप से, इस परंपरा ने समाज में व्याप्त विभिन्न सामाजिक कुरीतियों के विरोध और नैतिक जीवन मूल्यों के प्रचार पर बल दिया।

स्वामीनारायण परंपरा के अनुसार धर्म को केवल पूजा तक सीमित न मानकर, दैनिक जीवन के आचरण, विचार और व्यवहार से जोड़कर देखा जाता है। यही दृष्टिकोण आगे चलकर स्वामीनारायण संप्रदाय की पहचान बना।

बीएपीएस संस्था का परिचय

बीएपीएस (बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) स्वामीनारायण परंपरा से संबंधित एक संगठित धार्मिक संस्था है। संस्था का उद्देश्य मंदिर निर्माण के साथ-साथ धार्मिक अनुशासन, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

बीएपीएस संस्था भारत सहित विश्व के अनेक देशों में मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों का संचालन करती है। इन केंद्रों में पूजा-अर्चना के साथ-साथ धार्मिक शिक्षा और सामुदायिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।

बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर, सिलवासा की स्थापना

बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर, सिलवासा की स्थापना आधुनिक काल में स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से हुई। यह मंदिर किसी प्राचीन राजवंश या ऐतिहासिक साम्राज्य से संबद्ध नहीं है।

सिलवासा क्षेत्र में विभिन्न राज्यों से आए लोगों के बसने के साथ स्वामीनारायण परंपरा से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए एक संगठित धार्मिक स्थल की आवश्यकता महसूस की गई। इसी आवश्यकता के परिणामस्वरूप इस मंदिर की स्थापना की गई।

मंदिर की वास्तुकला और परिसर

मंदिर की वास्तुकला पारंपरिक भारतीय मंदिर शैली से प्रेरित है। संरचना में संतुलन, स्वच्छता और व्यवस्थित डिजाइन पर ध्यान दिया गया है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • पारंपरिक शैली में निर्मित शिखर

  • संतुलित और समरूप संरचना

  • स्वच्छ एवं शांत परिसर

  • स्पष्ट प्रवेश और निकास व्यवस्था

मंदिर परिसर को इस प्रकार विकसित किया गया है कि श्रद्धालु पूजा और धार्मिक गतिविधियों में सहज रूप से भाग ले सकें।

धार्मिक गतिविधियाँ (परंपरा आधारित)

बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर, सिलवासा में नियमित रूप से पारंपरिक धार्मिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • दैनिक पूजा-अर्चना और आरती

  • भजन और सामूहिक प्रार्थना

  • धार्मिक प्रवचन

  • ध्यान और शास्त्रसम्मत पूजा विधियाँ

इन गतिविधियों का उद्देश्य धार्मिक परंपरा का पालन और सांस्कृतिक अनुशासन को बनाए रखना है।

नोट: ये गतिविधियाँ धार्मिक परंपरा पर आधारित हैं और किसी व्यक्तिगत परिणाम या प्रभाव की गारंटी नहीं दर्शातीं।

सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका

यह मंदिर केवल पूजा स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र है।

यहाँ समय-समय पर:

  • नैतिक एवं सांस्कृतिक शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम

  • पारंपरिक सांस्कृतिक आयोजन

  • सामुदायिक धार्मिक कार्यक्रम

  • सामाजिक सहभागिता से जुड़े आयोजन

आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक निरंतरता बनाए रखना है।

मंदिर तक कैसे पहुँचें

बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर, सिलवासा तक पहुँचना सरल है:

  • सड़क मार्ग से सिलवासा शहर से सीधी पहुँच

  • निकटतम रेलवे स्टेशन: वापी

  • प्रमुख नज़दीकी शहर: सूरत और मुंबई

मंदिर मुख्य मार्ग के समीप स्थित है।

सामान्य प्रश्नोत्तर

प्रश्न: यह मंदिर किस संप्रदाय से संबंधित है?
उत्तर: यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय से संबंधित है।

प्रश्न: क्या मंदिर में प्रवेश शुल्क लिया जाता है?
उत्तर: नहीं, प्रवेश निःशुल्क है।

प्रश्न: क्या यह मंदिर प्राचीन है?
उत्तर: नहीं, यह मंदिर आधुनिक काल में स्थापित हुआ है।

निष्कर्ष

बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर, सिलवासा एक आधुनिक धार्मिक स्थल है, जो स्वामीनारायण परंपरा से जुड़ी पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक गतिविधियों और सामुदायिक सहभागिता का केंद्र है। यह मंदिर धार्मिक अनुशासन और सांस्कृतिक निरंतरता के उदाहरण के रूप में जाना जाता है।

| बीएपीएस (बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था) | शर्मा जी की यात्रा |

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