गायत्री मणिबंध पुष्कर: शक्तिपीठ का इतिहास व दिव्य महत्व

गायत्री मणिबंध पुष्कर: शक्तिपीठ का इतिहास व दिव्य महत्व

गायत्री मणिबंध शक्तिपीठ, पुष्कर

इतिहास, पौराणिक संदर्भ, भौगोलिक स्थिति और सांस्कृतिक महत्व

परिचय

राजस्थान के प्रसिद्ध तीर्थ नगर पुष्कर में स्थित गायत्री मणिबंध शक्तिपीठ सनातन परंपरा में वर्णित शक्तिपीठों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार, यह उन स्थलों में गिना जाता है जहाँ माता सती के शरीर का मणिबंध (कलाई का भाग) गिरा था। इसी मान्यता के आधार पर इसे मणिबंध शक्तिपीठ कहा जाता है।

यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से पुष्कर की पहचान का एक हिस्सा माना जाता है। यहाँ देवी की उपासना माता गायत्री के स्वरूप में तथा भैरव की उपासना सर्वानंद भैरव के रूप में की जाती है, जैसा कि विभिन्न शाक्त परंपराओं में वर्णित है।

पौराणिक संदर्भ

(लोक-आस्था के अनुसार)

शाक्त परंपराओं में प्रचलित कथा के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ प्रसंग के बाद भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर विचरण कर रहे थे। सृष्टि संतुलन हेतु भगवान विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अंग पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर गिरे, जिन्हें शक्तिपीठ कहा गया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुष्कर क्षेत्र में सती का मणिबंध गिरने का उल्लेख मिलता है। यह कथा धार्मिक ग्रंथों, परंपरागत सूचियों और लोक-मान्यताओं का हिस्सा मानी जाती है।

ऐतिहासिक एवं भौगोलिक पृष्ठभूमि

पुष्कर भारत के प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। यह नगर वैदिक परंपरा, यज्ञ संस्कृति और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। ऐतिहासिक दृष्टि से पुष्कर क्षेत्र में विभिन्न कालखंडों में धार्मिक संरचनाओं और पूजा-स्थलों का विकास हुआ।

धर्मग्रंथों और इतिहासकारों के अनुसार, गुप्त काल (लगभग 4वीं–6वीं शताब्दी ई.) में शक्ति उपासना को संगठित स्वरूप मिला और कई शक्तिपीठों को स्थायी धार्मिक पहचान प्राप्त हुई। मणिबंध शक्तिपीठ की मान्यता भी इसी व्यापक धार्मिक परंपरा से जुड़ी मानी जाती है।

मंदिर का इतिहास

गायत्री मणिबंध शक्तिपीठ का विकास किसी एक शासक या काल से नहीं, बल्कि दीर्घकालीन धार्मिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है। विभिन्न कालखंडों में स्थानीय समाज, श्रद्धालुओं और धार्मिक समुदायों द्वारा पूजा-परंपरा को बनाए रखा गया।

मध्यकाल में पुष्कर एक प्रमुख धार्मिक नगर के रूप में विकसित हुआ और आधुनिक काल में मंदिर-समितियों व स्थानीय प्रशासन द्वारा मंदिर की व्यवस्थाओं को संगठित किया गया।

वास्तुकला एवं संरचना

मंदिर की वास्तुकला में उत्तर भारतीय नागर शैली और स्थानीय राजस्थानी स्थापत्य का प्रभाव देखा जाता है। संरचना अपेक्षाकृत सरल है, जिसमें गर्भगृह, मंडप और खुला प्रांगण शामिल है। यह शैली धार्मिक स्थल की शांति और पारंपरिक स्वरूप को दर्शाती है।

मुख्य देवी-देवता

  • शक्ति स्वरूप: माता गायत्री

  • भैरव: सर्वानंद भैरव

धार्मिक परंपराओं में शक्तिपीठों पर शक्ति और भैरव की संयुक्त उपासना का उल्लेख मिलता है, जिसे शाक्त परंपरा का अंग माना जाता है।

धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व

गायत्री मणिबंध शक्तिपीठ को पुष्कर की धार्मिक परंपरा का एक भाग माना जाता है। यहाँ वर्ष भर धार्मिक आयोजन, सामूहिक पूजा और सांस्कृतिक गतिविधियाँ होती हैं, जो स्थानीय समाज और तीर्थयात्रियों की सहभागिता को दर्शाती हैं।

प्रमुख पर्व एवं आयोजन

  • नवरात्रि (चैत्र एवं शारदीय)

  • गायत्री जयंती

  • कार्तिक पूर्णिमा (पुष्कर मेला काल)

  • महाशिवरात्रि

इन अवसरों पर मंदिर परिसर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिन्हें परंपरागत आस्था और सामाजिक आयोजन के रूप में देखा जाता है।

दर्शन समय

(स्थानीय परंपरा के अनुसार)

  • प्रातः: 5:30 बजे से 12:00 बजे तक

  • सायं: 4:00 बजे से 8:30 बजे तक

विशेष पर्वों पर दर्शन समय में परिवर्तन संभव है।

कैसे पहुँचें

रेल मार्ग

  • निकटतम स्टेशन: अजमेर जंक्शन (लगभग 15 किमी)

सड़क मार्ग

  • अजमेर से पुष्कर: लगभग 15 किमी

  • जयपुर से पुष्कर: लगभग 145 किमी

हवाई मार्ग

  • निकटतम हवाई अड्डा: किशनगढ़ एयरपोर्ट (लगभग 40 किमी)

निष्कर्ष

गायत्री मणिबंध शक्तिपीठ, पुष्कर एक ऐसा धार्मिक स्थल है जो पौराणिक मान्यताओं, ऐतिहासिक परंपराओं और स्थानीय संस्कृति से जुड़ा माना जाता है। यह स्थान पुष्कर की व्यापक धार्मिक पहचान का हिस्सा है और शाक्त परंपरा में इसका विशेष उल्लेख मिलता है।

अस्वीकरण

यह लेख ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं पर आधारित है। इसमें वर्णित मान्यताएँ लोक-आस्था और ग्रंथीय परंपरा का हिस्सा हैं। यह लेख किसी प्रकार के चमत्कार, गारंटी, उपचार, परिणाम या व्यक्तिगत लाभ का दावा नहीं करता।


| 51 शक्तिपीठों में मणिबंध शक्तिपीठ का विशेष स्थान | पुष्कर का आधिकारिक पर्यटन पेज |

इस मंदिर से जुड़ा अनुभव साझा करें:

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.