शक्ति दक्षायनी मानसरोवर, तिब्बत – पवित्र दक्षायनी शक्तिपीठ मानसरोवर झील

शक्ति दक्षायनी मानसरोवर, तिब्बत – पवित्र दक्षायनी शक्तिपीठ मानसरोवर झील

परिचय: दक्षायनी शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व

मानसरोवर झील के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित दक्षायनी शक्तिपीठ को 51 शक्तिपीठों में से एक के रूप में वर्णित किया जाता है।
धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक परंपराओं के अनुसार, यह स्थल देवी सती से जुड़ी कथा के कारण विशेष श्रद्धा का केंद्र माना जाता है।

यह क्षेत्र कैलाश पर्वत के समीप स्थित होने के कारण हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन परंपराओं में एक महत्वपूर्ण तीर्थ क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।

दक्षायनी शक्तिपीठ की भौगोलिक स्थिति

दक्षायनी शक्तिपीठ तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के बुरांग (पुरांग) काउंटी में मानसरोवर झील के दक्षिण-पश्चिमी किनारे पर स्थित माना जाता है।

प्रमुख भौगोलिक तथ्य

  • ऊँचाई: लगभग 4,500–4,600 मीटर

  • निकटवर्ती स्थल: कैलाश पर्वत (लगभग 30 किमी)

  • परिसर: मानसरोवर झील का तटवर्ती क्षेत्र

  • प्राकृतिक परिवेश: हिमालयी पठार, शीत जलवायु

पौराणिक संदर्भ और परंपराएँ

शक्तिपीठ परंपरा के अनुसार, दक्ष यज्ञ की कथा से जुड़े प्रसंगों में देवी सती के अंगों के पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर प्रतिष्ठित होने का वर्णन मिलता है।
इन्हीं धार्मिक कथाओं में मानसरोवर क्षेत्र को दक्षायनी शक्तिपीठ के रूप में जोड़ा गया है।

ये विवरण धार्मिक ग्रंथों, तंत्र साहित्य और लोक-परंपराओं पर आधारित हैं।

विभिन्न धार्मिक परंपराओं में महत्व

मानसरोवर क्षेत्र को चार प्रमुख परंपराओं में विशेष सम्मान प्राप्त है:

  • हिंदू परंपरा: शक्तिपीठ एवं कैलाश क्षेत्र

  • बौद्ध परंपरा: ध्यान और मठ संस्कृति

  • जैन परंपरा: तीर्थ स्थल से जुड़ी मान्यताएँ

  • बोन परंपरा: प्राचीन तिब्बती आस्था

इस कारण यह क्षेत्र धार्मिक-सांस्कृतिक संगम के रूप में जाना जाता है।

पूजा-परंपरा और अनुष्ठान

दक्षायनी शक्तिपीठ क्षेत्र में पूजा-अनुष्ठान स्थानीय तिब्बती मठ परंपराओं और हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था के अनुरूप किए जाते हैं।

प्रमुख परंपराएँ

  • मानसरोवर तट पर प्रार्थना

  • देवी दक्षायनी का स्मरण

  • कैलाश क्षेत्र की परिक्रमा (धार्मिक परंपरा के रूप में)

सभी अनुष्ठान श्रद्धा, परंपरा और धार्मिक विश्वास से जुड़े हैं।

स्थापत्य और स्थल स्वरूप

  • तिब्बती गोंफा (मठ) शैली

  • प्राकृतिक शिलाओं पर आधारित पूजा स्थल

  • प्रार्थना ध्वज और चैत्य संरचनाएँ

  • मानसरोवर झील के तटवर्ती दृश्य

यह पूरा क्षेत्र प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशिष्ट माना जाता है।

यात्रा व्यवस्था और परमिट जानकारी

मानसरोवर और कैलाश क्षेत्र की यात्रा विशेष अनुमति के अंतर्गत की जाती है।

आवश्यक व्यवस्थाएँ

  • चीन यात्रा वीज़ा (समूह यात्रा)

  • कैलाश-मानसरोवर परमिट

  • अधिकृत यात्रा एजेंसी के माध्यम से पंजीकरण

सामान्य यात्रा मार्ग

  • भारत → धारचुला / लिपुलेख

  • पुरांग → मानसरोवर क्षेत्र

यात्रा अवधि, मार्ग और नियम समय-समय पर प्रशासन द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।

आसपास के दर्शनीय स्थल

  • कैलाश पर्वत

  • डिरापुक मठ

  • राक्षस ताल (रावण ह्रद)

  • गौरी कुंड क्षेत्र

इन सभी स्थलों का उल्लेख धार्मिक और सांस्कृतिक ग्रंथों में मिलता है।

यात्रा संबंधी सुझाव

  • ऊँचाई वाले क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखें

  • आधिकारिक दिशानिर्देशों का पालन करें

  • समूह यात्रा को प्राथमिकता दें

  • स्थानीय नियमों और परंपराओं का सम्मान करें

निष्कर्ष

दक्षायनी शक्तिपीठ, मानसरोवर क्षेत्र का यह पवित्र स्थल धार्मिक ग्रंथों, पौराणिक कथाओं और बहुधार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ माना जाता है।
यह स्थान श्रद्धा, संस्कृति और हिमालयी विरासत का प्रतीक है, जिसे तीर्थयात्री परंपरागत आस्था के साथ देखते हैं।

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