श्रावणी शक्तिपीठ कन्याकुमारी – भारत के दक्षिणी छोर का शक्ति धाम

श्रावणी शक्तिपीठ कन्याकुमारी – भारत के दक्षिणी छोर का शक्ति धाम

परिचय: श्रावणी शक्तिपीठ का धार्मिक महत्व

श्रावणी शक्तिपीठ भारत के दक्षिणी छोर पर स्थित एक प्राचीन एवं अत्यंत श्रद्धेय शक्तिपीठ माना जाता है। यह स्थल कन्याकुमारी में स्थित है और भारतीय सनातन परंपरा में नारी शक्ति की उपासना से जुड़ा हुआ है।
धार्मिक ग्रंथों एवं लोक परंपराओं के अनुसार, यह शक्तिपीठ आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

श्रावणी शक्तिपीठ की भौगोलिक स्थिति

श्रावणी शक्तिपीठ तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में स्थित भागवती अम्मन मंदिर के रूप में जाना जाता है।
यह स्थान भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु माना जाता है, जहाँ अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर का त्रिवेणी संगम देखने को मिलता है।

स्थान विशेषताएँ

  • समुद्र तट से सटा प्राचीन मंदिर परिसर

  • सूर्योदय और सूर्यास्त के लिए विश्वविख्यात

  • शांत और श्रद्धामय वातावरण

पौराणिक कथा और उत्पत्ति

देवी भागवत पुराण एवं अन्य शक्तिग्रंथों के अनुसार, दक्ष यज्ञ की घटना के पश्चात देवी सती के शरीर का स्कंध भाग इस स्थान पर गिरा माना जाता है।
इसी कारण इस स्थल को “श्रावणी शक्तिपीठ” कहा जाता है।

धार्मिक परंपराओं में यह भी वर्णित है कि भगवान परशुराम द्वारा यहाँ देवी के कुमारी स्वरूप की स्थापना की गई, जिसे भगवती कन्या के रूप में पूजा जाता है।

यह विवरण धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित है।

ऐतिहासिक संदर्भ

  • संगम काल से तमिल साहित्य में उल्लेख

  • पांड्य, चोल और चेरा शासकों द्वारा संरक्षण

  • 19वीं शताब्दी में स्वामी विवेकानंद द्वारा कन्याकुमारी आगमन

आधुनिक काल में मंदिर परिसर का समय-समय पर जीर्णोद्धार किया गया है।

वास्तुकला और मंदिर संरचना

श्रावणी शक्तिपीठ की वास्तुकला में केरल और तमिल स्थापत्य शैली का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।

प्रमुख संरचनाएँ

  • पाँच मंजिला गोपुरम

  • ग्रेनाइट शिलाओं पर नक्काशी

  • गर्भगृह में देवी कुमारी की प्रतिष्ठित मूर्ति

  • समुद्र की ओर खुला मंडप

धार्मिक परंपराएँ और अनुष्ठान

यह शक्तिपीठ धार्मिक आस्था के अनुसार देवी के कुमारी स्वरूप की उपासना से जुड़ा माना जाता है।

प्रमुख धार्मिक आयोजन

  • नवरात्रि – विशेष कुमारी पूजा

  • श्रावणी मेला – समुद्र तट पर आरती

  • कार्तिगई दीपम – दीप प्रज्वलन परंपरा

सभी अनुष्ठान धार्मिक परंपराओं और श्रद्धा से जुड़े हुए हैं।

दर्शन व्यवस्था

  • प्रातः: 4:00 AM – 12:30 PM

  • सायं: 3:00 PM – 8:00 PM

  • दर्शन: सामान्यतः निःशुल्क

  • नवरात्रि के समय विशेष व्यवस्था

यात्रा मार्ग और आवास

कैसे पहुँचे

  • हवाई मार्ग: त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट – लगभग 90 किमी

  • रेल मार्ग: कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन – लगभग 1 किमी

  • सड़क मार्ग: NH-66 द्वारा प्रमुख शहरों से संपर्क

ठहरने की सुविधा

  • तमिलनाडु पर्यटन विकास निगम (TTDC) होटल

  • धर्मशालाएँ एवं स्थानीय होटल

आसपास के दर्शनीय स्थल

  • विवेकानंद रॉक मेमोरियल

  • थिरुवल्लुवर प्रतिमा

  • कन्याकुमारी समुद्र तट

  • सूर्यास्त एवं सूर्योदय स्थल

यात्रा सुझाव

  • सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च

  • मंदिर की मर्यादा के अनुरूप वस्त्र पहनें

  • स्थानीय नियमों और परंपराओं का सम्मान करें

निष्कर्ष

श्रावणी शक्तिपीठ कन्याकुमारी का यह पवित्र स्थल भारतीय सनातन परंपरा में नारी शक्ति, श्रद्धा और धार्मिक चेतना से जुड़ा हुआ माना जाता है।
यह स्थान आस्था, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत का संगम प्रस्तुत करता है।

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