तुंगभद्रा नदी – विष्णु और विरुपाक्ष की पावन संगम धारा

तुंगभद्रा नदी का परिचय
तुंगभद्रा नदी की भौगोलिक स्थिति
तुंगभद्रा नदी पश्चिमी घाट के गंगमूला पहाड़ी से निकलती है।
वहीं तुंगा और भद्रा नदियाँ कूडली में संगम करती हैं।
इसके अलावा ५३१ किलोमीटर लंबी यात्रा कर कृष्णा नदी में मिलती है।
परिणामस्वरूप हम्पी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल को अलंकृत करती है।
साथ ही बल्लारी, कोप्पल, रायचूर जिलों को सिंचित करती है।
विशेष रूप से तुंगभद्रा बांध जलविद्युत का प्रमुख स्रोत है।
तुंगभद्रा नदी का पौराणिक महत्व
तुंगभद्रा में विष्णु वराह अवतार
पुराणों के अनुसार वराह अवतार ने दंती से तुंगभद्रा उत्पन्न की।
कहा जाता है पंपा सरिता शिव-पार्वती विवाह स्थल रही।
मान्यता है रामायण में सीता वनवास मार्ग के रूप में वर्णित।
इसलिए हम्पी विरुपाक्ष पूजा का प्राचीन केंद्र बना।
इसके अलावा तुंगा विष्णु रूप और भद्रा शिव रूप मानी जाती हैं।
अंततः शिव-विष्णु संगम की पवित्र धारा कहलाती है।
तुंगभद्रा नदी का ऐतिहासिक महत्व
तुंगभद्रा तट विजयनगर साम्राज्य
प्राचीन काल से चालुक्य, राष्ट्रकूट राजाओं का संरक्षण प्राप्त।
वहीं दूसरी ओर १३३६ में हरिहर-बुक्का ने विजयनगर स्थापित।
परिणामस्वरूप हम्पी विश्व की सबसे समृद्ध नगरी बनी।
स्पष्ट रूप से १५८६ में अब्दुल कादिर ने हम्पी नष्ट की।
साथ ही तुंगभद्रा बांध १९५३ में निर्मित हुआ।
अंत में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित।
तुंगभद्रा नदी की धार्मिक मान्यता
तुंगभद्रा स्नान का पुण्य फल
पुराणों के अनुसार पंपा तीर्थ स्नान सभी पाप नष्ट करता है।
कहा जाता है विरुपाक्ष दर्शन नदी स्नान सहित मोक्षदायी।
मान्यता है संगमेश्वर तीर्थ कृष्णा संगम पर अवस्थित।
इसलिए भक्त तुंगभद्रा आरती अवश्य करते हैं।
इसके अलावा विरुपाक्ष रथ महोत्सव विशेष।
अंततः दक्षिण भारत का गंगा तीर्थ बन गई।
तुंगभद्रा नदी के प्रमुख यात्रा स्थल
तुंगभद्रा तट दर्शनीय स्थल
विरुपाक्ष मंदिर हम्पी का प्रथम दर्शन करें।
वहीं विठ्ठल मंदिर के संगीत स्तंभ अवश्य देखें।
इसके अलावा हजारा राम मंदिर के भित्ति चित्र मनमोहक।
परिणामस्वरूप अच्युत राया गुहा मंदिर भ्रमण करें।
साथ ही तुंगभद्रा बांध का विहंगम दृश्य लें।
विशेष रूप से मातंग हिल से सूर्योदय अवश्य देखें।
तुंगभद्रा नदी कैसे पहुँचें
तुंगभद्रा नदी यात्रा मार्ग
स्पष्ट रूप से हुबली हवाई अड्डा हम्पी का निकटतम है।
वहीं दूसरी ओर होस्पेट रेलवे स्टेशन सबसे सुगम।
इसके अलावा बेंगलुरु से ३५० किलोमीटर बस मार्ग।
परिणामस्वरूप हम्पी बस स्टैंड से नदी घाट पैदल।
साथ ही निजी टैक्सी और ऑटो रिक्शा उपलब्ध।
अंत में नदी सैर के लिए बोटिंग सुविधा।
तुंगभद्रा नदी के आसपास स्थल
तुंगभद्रा क्षेत्र पर्यटन स्थल
हम्पी बाजार प्राचीन व्यापारिक केंद्र देखें।
वहीं राजा संग्रहालय में अवशेष संग्रह देखें।
इसके अलावा कोरमंगल प्राचीन मंदिर समूह भ्रमण।
परिणामस्वरूप अनीघे तालाब में सूर्योदय का दृश्य लें।
साथ ही संकरी नारा की संकीर्ण गलियों का अनुभव।
विशेष रूप से विरुपाक्ष रथ उत्सव अवश्य देखें।
तुंगभद्रा नदी यात्रा समय
तुंगभद्रा नदी का सर्वोत्तम मौसम
अक्टूबर से फरवरी तक यात्रा आदर्श रहती है।
वहीं दूसरी ओर विरुपाक्ष कार महोत्सव मार्च में होता।
इसके अलावा मानसून में जलप्रपातों का सौंदर्य बढ़ता।
परिणामस्वरूप ग्रीष्मकाल में प्रातःकाल भ्रमण उपयुक्त।
साथ ही नवरात्रि में विशेष धार्मिक आयोजन।
अंततः उत्सवों के अनुसार यात्रा योजना बनाएँ।
तुंगभद्रा नदी यात्रा सुझाव
तुंगभद्रा नदी आने वाले भक्तों के लिए
हम्पी यात्रा के लिए कम से कम २ दिनों का समय रखें।
वहीं नदी स्नान से पूर्व स्वास्थ्य सलाह अवश्य लें।
इसके अलावा सूर्योदय के पूर्व मातंग हिल पहुँचें।
परिणामस्वरूप पूर्ण दर्शन और पर्यटन लाभ प्राप्त होगा।
साथ ही स्थानीय परंपराओं का पूरा सम्मान करें।
अंततः विजयनगर साम्राज्य का गौरवपूर्ण अनुभव लें।
महत्वपूर्ण संसाधन
आंतरिक संसाधन:
बाहरी संसाधन:


