विमला / किरीटेश्वरी मंदिर – मुरशिदाबाद शक्तिपीठ

विमला / किरीटेश्वरी मंदिर – मुरशिदाबाद शक्तिपीठ

किरीटेश्वरी मंदिर का परिचय

किरीटेश्वरी मंदिर की भौगोलिक स्थिति

किरीटेश्वरी मंदिर भगीरथी नदी के तट पर कृतिकोना में बसा हुआ है।
वहीं मुरशिदाबाद शहर से १८ किलोमीटर दूर स्थित है।
इसके अलावा नबग्राम ब्लॉक का प्रमुख धार्मिक केंद्र है।

परिणामस्वरूप शक्तिपीठ यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बन गया है।
साथ ही लालगोला राजाओं का संरक्षण प्राप्त रहा है।
विशेष रूप से बंगाल का प्राचीनतम शक्तिपीठ माना जाता है।

किरीटेश्वरी मंदिर की पौराणिक कथा

किरीटेश्वरी मंदिर में सती का मुकुट

पुराणों के अनुसार माता सती का किरीट (मुकुट) यहाँ गिरा था।
कहा जाता है देवी पुराण में इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
मान्यता है विमला देवी के रूप में सती प्रकट हुई थीं।

इसलिए महिषासुरमर्दिनी के नाम से भी पूजी जाती हैं।
इसके अलावा शिव पुराण में शक्तिपीठ का वर्णन है।
अंततः मोक्षदायिनी पीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

किरीटेश्वरी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

किरीटेश्वरी मंदिर का निर्माण इतिहास

प्राचीन काल से शक्ति उपासना का केंद्र रहा है।
वहीं दूसरी ओर १४०५ में मूल मंदिर नष्ट हो गया था।
परिणामस्वरूप १९वीं शताब्दी में दरपनारायण ने पुनर्निर्माण कराया।

स्पष्ट रूप से लालगोला के राजा का योगदान उल्लेखनीय है।
साथ ही रानी भवानी ने जलाशय बनवाए थे।
अंत में नवाब मीर जाफर का चरणामृत प्रसंग प्रसिद्ध है।

किरीटेश्वरी मंदिर की वास्तुकला

किरीटेश्वरी मंदिर का बंगाली स्थापत्य

पारंपरिक बंगाली टेराकोटा शैली में निर्मित है।
वहीं लाल बलुआ पत्थर से सुंदर नक्काशी की गई है।
इसके अलावा १६ छोटे मंदिरों का विशाल परिसर है।

परिणामस्वरूप रेक्हा डी शिखर विशेष आकर्षण का केंद्र है।
साथ ही देवी प्रतिमा चूनर पत्थर की लाल रंगीन है।
विशेष रूप से टेराकोटा कला अद्भुत रूप से उकेरी गई है।

किरीटेश्वरी मंदिर का धार्मिक महत्व

किरीटेश्वरी मंदिर में पूजा का फल

पुराणों के अनुसार संतान प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी है।
कहा जाता है नवरात्रि में चंडी पाठ भव्य रूप से होता है।
मान्यता है संकट निवारक शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है।

इसलिए विवाहित जोड़े विशेष दर्शन करते हैं।
इसके अलावा दुर्गा पूजा का प्रमुख केंद्र है।
अंततः बंगाली शाक्त परंपरा का प्रतीक बन गया है।

किरीटेश्वरी मंदिर दर्शन समय

किरीटेश्वरी मंदिर की पूजा व्यवस्था

सुबह ६ बजे से रात ९ बजे तक दर्शन सुगम हैं।
वहीं मंगला आरती प्रातः ६ बजे होती है।
इसके अलावा संध्या आरती सायं ७ बजे भव्य रूप से होती है।

परिणामस्वरूप शयन आरती रात्रि ९ बजे संपन्न होती है।
साथ ही नवरात्रि में रात्रि जागरण आयोजित होता है।
विशेष रूप से कोई प्रवेश शुल्क नहीं लगता है।

किरीटेश्वरी मंदिर कैसे पहुँचें

किरीटेश्वरी मंदिर यात्रा मार्ग

स्पष्ट रूप से मुरशिदाबाद रेलवे स्टेशन से १८ किमी दूर है।
वहीं दूसरी ओर कोलकाता से २२० किमी सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है।
इसके अलावा बंगाल टूरिज्म बस सेवा उपलब्ध है।

परिणामस्वरूप ऑटो रिक्शा से सुगम परिवहन होता है।
साथ ही भगीरथी पुल पार कर पहुँचा जाता है।
अंत में नदी तट पर पैदल दर्शन किए जाते हैं।

किरीटेश्वरी मंदिर के आसपास स्थल

किरीटेश्वरी मंदिर क्षेत्र के दर्शनीय स्थल

हाज़ी मोहम्मद मोहसिन कॉलेज निकटवर्ती है।
वहीं कथगोला पैलेस के अवशेष अवश्य देखें।
इसके अलावा भगीरथी नदी में स्नान योग्य है।

परिणामस्वरूप मुरशिदाबाद महल का भ्रमण करें।
साथ ही जफरगंज दरबार परिसर घूमें।
विशेष रूप से नवाबी विरासत का अनुभव प्राप्त करें।

किरीटेश्वरी मंदिर यात्रा समय

किरीटेश्वरी मंदिर का सर्वोत्तम मौसम

अक्टूबर से मार्च तक आदर्श काल है।
वहीं दूसरी ओर दुर्गा पूजा में विशेष उत्सव होता है।
इसके अलावा सरस्वती पूजा जनवरी में भव्य रहती है।

परिणामस्वरूप वर्षा ऋतु में नदी का सौंदर्य बढ़ जाता है।
साथ ही ग्रीष्मकाल में भी दर्शन सुगम रहते हैं।
अंततः त्योहारों के अनुसार यात्रा योजना बनाएँ।

किरीटेश्वरी मंदिर यात्रा सुझाव

किरीटेश्वरी मंदिर आने वाले भक्तों के लिए

नवरात्रि से पूर्व बुकिंग अवश्य कराएँ।
वहीं बंगाली भोज का स्वाद अवश्य लें।
इसके अलावा टेराकोटा कला के फोटो अवश्य लें।

परिणामस्वरूप पूर्ण दर्शन लाभ प्राप्त होगा।
साथ ही स्थानीय परंपराओं का सम्मान करें।
अंततः शक्तिपीठ यात्रा को पूर्ण करें।


महत्वपूर्ण संसाधन

आंतरिक संसाधन:

बाहरी संसाधन:

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