यमुना नदी – श्रीकृष्ण की लीला भूमि पावन धारा

यमुना नदी – श्रीकृष्ण की लीला भूमि पावन धारा

यमुना नदी का परिचय

यमुना नदी की भौगोलिक स्थिति

यमुना नदी उत्तराखंड के यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है।
वहीं बंदरपंच चोटी से अपना उद्गम लेती है।
इसके अलावा कुल १३७६ किलोमीटर लंबी यात्रा करती है।

परिणामस्वरूप प्रयागराज में गंगा से मिलकर त्रिवेणी संगम बनाती है।
साथ ही कुंभ मेला का प्रमुख स्थल बन जाती है।
विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र में श्रीकृष्ण लीला भूमि कहलाती है।

यमुना नदी का पौराणिक महत्व

यमुना नदी में श्रीकृष्ण की लीलाएँ

पुराणों के अनुसार यमुना कालिया नाग दमन का स्थल रही है।
कहा जाता है श्रीकृष्ण ने इसके विषैले जल को शुद्ध किया था।
मान्यता है वसुदेव ने बालकृष्ण को यमुना पार कराया था।

इसलिए ब्रजभूमि इसके तट पर ही विकसित हुई।
इसके अलावा भागवत पुराण में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।
अंततः यमुना को श्रीकृष्ण की सखी के रूप में पूजा जाता है।

यमुना नदी का ऐतिहासिक महत्व

यमुना नदी के तट पर बसे तीर्थ

प्राचीन काल से मथुरा यमुना तट पर ही बसी रही है।
वहीं दूसरी ओर वृंदावन रासलीला की भूमि बनी।
परिणामस्वरूप गोवर्धन धाम इसके निकटवर्ती क्षेत्र में विकसित हुआ।

स्पष्ट रूप से प्रयागराज का त्रिवेणी संगम कुंभ का केंद्र बना।
साथ ही चंबल यमुना संगम पवित्र तीर्थस्थल कहलाया।
अंत में ब्रज संस्कृति का उद्गम स्थल बन गया।

यमुना नदी की धार्मिक मान्यता

यमुना नदी में स्नान का महत्व

पुराणों के अनुसार यमुना स्नान यम भय को नष्ट करता है।
कहा जाता है त्रिवेणी संगम स्नान मोक्ष प्रदान करने वाला है।
मान्यता है कालिंदसागर यमुना का वैदिक नाम है।

इसलिए भक्त नियमित यमुना आरती का आयोजन करते हैं।
इसके अलावा वृंदावन के घाट विशेष रूप से सुंदर हैं।
अंततः पवित्र धारा जीवन को शुद्ध करने वाली बनती है।

यमुना नदी के प्रमुख यात्रा स्थल

यमुना नदी तट के घाट और दर्शन

मथुरा का विश्राम घाट अत्यंत प्रसिद्ध है।
वहीं वृंदावन का केसरी घाट भक्तों का केंद्र है।
इसके अलावा बटसागर घाट भजन कीर्तन का स्थल बना।

परिणामस्वरूप ब्रज चौरासी कोस यात्रा का मार्ग प्रशस्त हुआ।
साथ ही गोवर्धन परिक्रमा इसके तट से प्रारंभ होती है।
विशेष रूप से यमुना आरती का दृश्य अविस्मरणीय होता है।

यमुना नदी कैसे पहुँचें

यमुना नदी तीर्थ यात्रा के मार्ग

स्पष्ट रूप से यमुनोत्री चार धाम का प्रथम पड़ाव है।
वहीं दूसरी ओर मथुरा वृंदावन रेल मार्ग से सुगम पहुँच।
इसके अलावा प्रयागराज कुंभ के लिए हवाई अड्डा उपलब्ध।

परिणामस्वरूप ब्रज यात्रा के लिए बस पैकेज सुविधाजनक हैं।
साथ ही निजी वाहनों से यात्रा आसान हो जाती है।
अंत में नदी घाट तक पैदल दूरी तय करनी पड़ती है।

यमुना नदी के आसपास के स्थल

यमुना नदी क्षेत्र के पर्यटन स्थल

वृंदावन का इस्कॉन मंदिर अवश्य दर्शन करें।
वहीं मथुरा का द्वारकाधीश मंदिर भक्तों का केंद्र है।
इसके अलावा गोवर्धन का अनूपम लाल जी मंदिर देखें।

बरसाना की राधारानी मंदिर यात्रा करें।
साथ ही नंदगाँव में नंद बाबा का धाम दर्शन करें।
विशेष रूप से ब्रजमंडल की परिक्रमा अवश्य पूरी करें।

यमुना नदी यात्रा का समय

यमुना नदी के लिए सर्वोत्तम मौसम

अक्टूबर से मार्च तक यात्रा आदर्श रहती है।
वहीं दूसरी ओर होली के फागोत्सव में ब्रज भक्तों से भरा रहता।
इसके अलावा प्रयागराज कुंभ मेला विशेष अवसर प्रदान करता।

परिणामस्वरूप वर्षा ऋतु में आरती का दृश्य मनमोहक होता है।
साथ ही ग्रीष्मकाल में भी दर्शन सुगम रहते हैं।
अंततः मौसम के अनुसार यात्रा की योजना बनानी चाहिए।

यमुना नदी यात्रा के सुझाव

यमुना नदी आने वाले भक्तों के लिए

ब्रज यात्रा के लिए कम से कम ५ दिनों का समय रखें।
वहीं यमुना स्नान से पूर्व स्वास्थ्य सलाह अवश्य लें।
इसके अलावा आरती के निर्धारित समय का ध्यान रखें।

परिणामस्वरूप सभी दर्शन सुगमता से पूरे हो जाएंगे।
साथ ही स्थानीय परंपराओं का पूरा सम्मान करें।
अंततः ब्रज संस्कृति का पूर्ण अनुभव प्राप्त करें।


महत्वपूर्ण संसाधन

आंतरिक संसाधन:

बाहरी संसाधन:

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