श्री गंगोत्री धाम – उत्तरकाशी का गंगा उद्गम दिव्य तीर्थ

श्री गंगोत्री धाम – उत्तरकाशी का गंगा उद्गम दिव्य तीर्थ

श्री गंगोत्री धाम का परिचय

श्री गंगोत्री धाम – गंगा माता का उद्गम

श्री गंगोत्री धाम उत्तरकाशी में स्थित है।
वहीं भगीरथी नदी का उद्गम स्थल है।
इसके अलावा चार धामों में प्रथम धाम कहलाता है।

परिणामस्वरूप लाखों भक्त स्नान करते हैं।
साथ ही ३१०० मीटर ऊँचाई पर विराजमान है।
विशेष रूप से गौमुख ग्लेशियर निकट है।

श्री गंगोत्री धाम की पौराणिक कथा

श्री गंगोत्री धाम – भगीरथ की तपस्थली

पुराणों के अनुसार राजा भगीरथ ने तपस्या की।
कहा जाता है गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी।
मान्यता है शिवजी ने जटाओं में समेटा।

इसलिए गंगोत्री नाम पड़ा।
इसके अलावा महाभारत में पांडवों का यज्ञ हुआ।
अंततः पाप नाशक तीर्थ बन गया।

श्री गंगोत्री धाम का ऐतिहासिक महत्व

श्री गंगोत्री धाम – गोरखा निर्माण

प्राचीन काल से तीर्थयात्रा होती रही।
वहीं दूसरी ओर अमर सिंह थापा ने मंदिर बनवाया।
परिणामस्वरूप १८वीं शताब्दी में वर्तमान स्वरूप मिला।

स्पष्ट रूप से जयपुर राजा माधो सिंह ने जीर्णोद्धार किया।
साथ ही नेपाल गोरखा जनरल का योगदान है।
अंत में चार धाम यात्रा का केंद्र बना।

श्री गंगोत्री धाम की वास्तुकला

श्री गंगोत्री धाम – नागर शैली का सफेद मंदिर

इसलिए सफेद ग्रेनाइट से निर्मित है।
वहीं उत्तर भारतीय नागर शैली है।
इसके अलावा गंगा माता की चांदी प्रतिमा है।

परिणामस्वरूप हिमालयी पृष्ठभूमि में चमकता है।
साथ ही सरल स्वरूप शांतिप्रद है।
विशेष रूप से गंगा स्रोत के निकट बना है।

श्री गंगोत्री धाम का धार्मिक महत्व

श्री गंगोत्री धाम – मोक्षदायिनी गंगा

पुराणों के अनुसार स्नान से पाप नष्ट होते हैं।
कहा जाता है भगीरथ घाट पवित्र है।
मान्यता है गंगा सागर यात्रा का प्रारंभ बिंदु है।

इसलिए श्राद्ध कर्म विशेष फलदायी हैं।
इसके अलावा आदि विसर्जन का स्थान है।
अंततः चार धाम पूर्णता का प्रतीक है।

श्री गंगोत्री धाम दर्शन समय

श्री गंगोत्री धाम – पूजा विधि

इसलिए अप्रैल से नवंबर तक खुला रहता है।
वहीं सुबह ६ से रात ९ दर्शन होते हैं।
इसके अलावा आरती सुबह-शाम भव्य है।

परिणामस्वरूप गंगा स्नान पूर्व पूजा करें।
साथ ही कपड़े दान करें।
विशेष रूप से शीतकाल में मुक्तेश्वर स्थानांतरित होता है।

श्री गंगोत्री धाम कैसे पहुँचें

श्री गंगोत्री धाम – यात्रा मार्ग

स्पष्ट रूप से हरिद्वार से २४० किमी सड़क मार्ग।
वहीं दूसरी ओर ऋषिकेश रेलवे स्टेशन निकट है।
इसके अलावा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा सुगम है।

परिणामस्वरूप हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है।
साथ ही जीएमवीएन बसें चलती हैं।
अंत में टैक्सी भाड़ा संयमित है।

श्री गंगोत्री धाम के आसपास स्थल

श्री गंगोत्री धाम – दर्शनीय स्थान

इसलिए गौमुख ग्लेशियर अवश्य जायें।
वहीं केदारताल झील सुंदर है।
इसके अलावा भगीरथ शिला पवित्र है।

परिणामस्वरूप नंदनवन घाटी आकर्षक है।
साथ ही त्रिवेणी घाट स्नान करें।
विशेष रूप से यमुनोत्री निकट है।

श्री गंगोत्री धाम यात्रा समय

श्री गंगोत्री धाम – सर्वोत्तम मौसम

इसलिए मई से अक्टूबर आदर्श समय है।
वहीं दूसरी ओर जून-जुलाई मौसम सुहावना है।
इसके अलावा मानसून में सतर्क रहें।

परिणामस्वरूप कम यात्रियों में शांति मिलती है।
साथ ही ऊनी वस्त्र आवश्यक हैं।
अंततः मौसम पूर्वानुमान जांचें।

श्री गंगोत्री धाम का निष्कर्ष

श्री गंगोत्री धाम – गंगा माता का आशीर्वाद

इसलिए चार धाम यात्रा प्रारंभ करें।
वहीं गंगोत्री धाम जीवन धन्य करता है।
इसके अलावा पवित्र स्नान अवश्य करें।

परिणामस्वरूप मन शुद्ध हो जाता है।
साथ ही कृपा प्राप्ति का विश्वास है।
अंततः गंगा माई की जय!


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