श्री बद्रीनाथ धाम – चमोली का चार धाम दिव्य तीर्थ

श्री बद्रीनाथ धाम – हिमालय का रत्न
इसलिए श्री बद्रीनाथ धाम चमोली में बसा है।
वहीं अलकनंदा नदी किनारे स्थित है।
इसके अलावा चार धामों का प्रमुख धाम है।
परिणामस्वरूप लाखों भक्त आकर्षित होते हैं।
साथ ही ३१३३ मीटर ऊँचाई पर विराजमान है।
विशेष रूप से नीलकंठ चोटी घेरे हुए है।
श्री बद्रीनाथ धाम की पौराणिक कथा
श्री बद्रीनाथ धाम – विष्णु भगवान की तपोभूमि
पुराणों के अनुसार विष्णुजी ने तपस्या की।
कहा जाता है नारद ने प्रार्थना की।
मान्यता है स्वयंभू मूर्ति प्रकट हुई।
इसलिए बद्री वन पवित्र हो गया।
इसके अलावा स्कंद पुराण में वर्णन है।
अंततः मोक्षदायी तीर्थ बन गया।
श्री बद्रीनाथ धाम का ऐतिहासिक महत्व
श्री बद्रीनाथ धाम – शंकराचार्य की खोज
प्राचीन काल से तीर्थयात्रा होती रही।
वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य ने खोजा।
परिणामस्वरूप मंदिर स्थापित हुआ।
स्पष्ट रूप से ज्योतिर्मठ की स्थापना हुई।
साथ ही राजाओं ने दान दिया।
अंत में भव्य स्वरूप प्राप्त हुआ।
श्री बद्रीनाथ धाम की वास्तुकला
श्री बद्रीनाथ धाम – नागर शैली का आलम
इसलिए नागर शैली में निर्मित है।
वहीं पंच श्रृंगी शिखर मनमोहक है।
इसके अलावा काले पत्थर की मूर्ति है।
परिणामस्वरूप गरुड़ प्रतिमा विशेष आकर्षण है।
साथ ही सोने का छत्र चमकता है।
विशेष रूप से सिंह द्वार भव्य है।
श्री बद्रीनाथ धाम का धार्मिक महत्व
श्री बद्रीनाथ धाम – शांति का स्रोत
पुराणों के अनुसार त्रिवेणी स्नान पुण्यकारी है।
कहा जाता है तप्त कुंड चमत्कारी है।
मान्यता है ब्रह्म कपाल मोक्षदायी है।
इसलिए भक्त बार-बार आते हैं।
इसके अलावा नर-नारायण गुफा ध्यानस्थल है।
अंततः आस्था मजबूत होती है।
श्री बद्रीनाथ धाम दर्शन समय
श्री बद्रीनाथ धाम – पूजा की जानकारी
इसलिए अप्रैल से नवंबर खुला रहता है।
वहीं सुबह ६ से रात ९ दर्शन।
इसके अलावा आरती समय विशेष है।
परिणामस्वरूप अभिषेक बुकिंग से होता है।
साथ ही महाराज दर्शन रोचक है।
विशेष रूप से शीतकाल में स्थानांतरण होता है।
श्री बद्रीनाथ धाम कैसे पहुँचें
श्री बद्रीनाथ धाम – यात्रा मार्ग
स्पष्ट रूप से हरिद्वार से ३०० किमी सड़क।
वहीं दूसरी ओर ऋषिकेश रेल निकटतम।
इसके अलावा जॉली ग्रांट हवाई सुगम है।
परिणामस्वरूप हेली सेवा उपलब्ध है।
साथ ही बसें नियमित चलती हैं।
अंत में टैक्सी सुविधाजनक है।
श्री बद्रीनाथ धाम के आसपास स्थल
श्री बद्रीनाथ धाम – दर्शनीय स्थान
इसलिए माणा गाँव अंतिम गाँव है।
वहीं वसुधारा झरना अद्भुत है।
इसके अलावा भीम पुल चमत्कारिक है।
परिणामस्वरूप व्यास गुफा ज्ञान केंद्र है।
साथ ही सरस्वती उद्गम देखें।
विशेष रूप से तप्त कुंड स्नान करें।
श्री बद्रीनाथ धाम यात्रा समय
श्री बद्रीनाथ धाम – आदर्श मौसम
इसलिए मई-अक्टूबर सर्वोत्तम समय है।
वहीं दूसरी ओर जून-जुलाई सुहावना रहता है।
इसके अलावा मानसून सावधानीपूर्वक यात्रा।
परिणामस्वरूप कम भीड़ शांत दर्शन देती है।
साथ ही ऊनी वस्त्र आवश्यक हैं।
अंततः मौसम अपडेट लें।
श्री बद्रीनाथ धाम का निष्कर्ष
श्री बद्रीनाथ धाम – भक्ति का परम स्थान
इसलिए चार धाम यात्रा पूर्ण करें।
वहीं बद्रीनाथ जीवन बदल देता है।
इसके अलावा कृपा का विश्वास बनता है।
परिणामस्वरूप मन प्रसन्न हो जाता है।
साथ ही स्मृतियाँ अमर रहती हैं।
अंततः जय बद्री विशाल!


